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इच्छा मृत्यु: प्रदेश के 370 से अधिक लोग चाहते हैं हरीश राणा जैसी मौत, मुंबई के 72 लोगों ने दाखिल किया लिंविंग विल

Mumbai News. मुंबई सहित प्रदेश के 370 से अधिक लोगों ने गंभीर बीमारी या हादसे की स्थिति में पैसिव यूथेनेशिया के लिए ‘लिविंग विल' दाखिल किया है। इसमें मुंबई के 72 लोगों का समावेश है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किए गए 423 से अधिक कस्टोडियन के पास यह विल दाखिल की गई है। हालांकि इस लिविंग विल को किस तरह से अमल में लाया जाएगा इसके लिए सरकार की ओर से मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का काम अभी जारी है।
मुंबई के डॉक्टर डॉ. निखिल दातार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 24 जनवरी 2023 को निर्देश दिया था कि स्थानीय सरकारी संस्थाओं के लिए ‘एडवांस मेडिकल डायरेक्टिव' (एएमडी) को स्वीकार करना, सुरक्षित रखना और प्रबंधन करना अनिवार्य होगा। एएमडी को ही आम भाषा में लिविंग विल या राइट टू डाई कहा जाता है। याचिकाकर्ता डॉ. निखिल दातार ने बताया कि कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने प्रदेश में 423 कस्टोडियन नियुक्त किये थे। डॉ. दातार ने बताया की इन अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे लिविंग विल को सुरक्षित रखें और जरुरत पड़ने पर उसे उपलब्ध कराएं।
मुंबई में करीब 72 लोगों ने किया आवेदन
मुंबई मनपा की कार्यकारी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दक्षा शाह ने बताया कि कोर्ट के निर्देश के बाद सभी प्रशासनिक वार्ड में अधिकारी नियुक्त किए गए। बीते दो साल में 72 लोगों ने इन अधिकारियों के पास लिविंग विल जमा कराया है। उन्होंने बताया कि इस विल को किस तरह से अमल में लाया जाना है इसके लिए राज्य सरकार की ओर से एसओपी तैयार की जा रही है। इतना ही नहीं इसके डिजिटलीकरण का काम भी जारी है।
रोजाना दो से तीन लोगों के आते हैं कॉल
डॉ. दातार ने बताया कि वे पहले व्यक्ति हैं जिन्होंने अपना लिविंग विल नोटरी करके दाखिल किया है। उन्होंने बताया कि लिविंग विल को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है। रोजाना दो से तीन कॉल लिविंग विल के आवेदन के संदर्भ में उनके पास आते हैं। फोन करनेवालों में ज्यादातर 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोग होते हैं।
डिजिटलीकरण अभी अधूरा, पोर्टल बनाने की तैयारी
डॉ. दातार ने बताया कि अभी इस प्रक्रिया को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए कई कदम उठाने बाकी हैं। खासकर डिजिटलीकरण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इसके डिजिटलीकरण की समय-सीमा जुलाई 2025 तय की थी। लेकिन यह काम अभी भी अधूरा है।
क्या है लिविंग विल
यह एक ऐसा दस्तावेज है जिसे कोई व्यक्ति पहले से तैयार करता है। इसमें वह यह तय करता है कि यदि भविष्य में वह किसी गंभीर बीमारी, दुर्घटना या बेहोशी की स्थिति में खुद निर्णय लेने के हालात में नहीं रहेगा तो उसे किस प्रकार का इलाज दिया जाए या न दिया जाए।
Created On :   26 March 2026 10:36 PM IST








