नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिला सांसदों के समर्थन से संशोधन पर जोर बढ़ा
नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। केंद्र सरकार अब संसद में दो बड़े बिल लाने की तैयारी कर रही है, जिनका मकसद महिलाओं के लिए विधायी निकायों में एक-तिहाई आरक्षण को लागू करना है। इस पहल का विभिन्न दलों की महिला सांसदों ने स्वागत किया है और इसे महिलाओं के सशक्तीकरण और समावेशी विकास की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण कदम बताया है।
पहले यह आरक्षण नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तहत अगले जनगणना और सीटों के परिसीमन से जोड़ा गया था। अब सरकार इस आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग करके लागू करने पर विचार कर रही है। इसका मतलब है कि महिलाओं को मिलने वाला आरक्षण अब लंबित जनगणना के इंतजार में नहीं फंसेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गैर-कांग्रेस विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके इस पर राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश की। सरकार का इरादा है कि संसद में इस बदलाव के लिए व्यापक समर्थन जुटाया जाए।
इस प्रस्तावित बिल के तहत महिला आरक्षण कानून में कुछ अहम बदलाव किए जाएंगे। इससे पहले यह आरक्षण अगली जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन पर निर्भर था। अब जनगणना में हो रही देरी के चलते, सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही इस आरक्षण को लागू करने पर विचार कर रही है।
भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट कर चुके हैं और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जो उनकी योजना है, वह काफी उत्साहजनक है। पिछले 10 सालों में महिलाओं के विकास के लिए कई नई नीतियां लागू की गई हैं। आज महिलाएं हर क्षेत्र में प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस कदम का स्वागत किया और कहा कि अब महिलाओं को लंबे समय से लंबित उनका हक मिलेगा। पहले यह आरक्षण अगले जनगणना और परिसीमन से जोड़ा गया था, लेकिन अब 2011 की जनगणना के आधार पर संसद में सीटों का विस्तार होगा और महिलाओं को उनका वास्तविक प्रतिनिधित्व, सम्मान और समानता मिलेगी।
जेडीयू सांसद लवली आनंद ने इसे सकारात्मक कदम बताया और कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उठाया जा रहा यह कदम स्वागत योग्य है। देश तभी आगे बढ़ सकता है, जब महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित न रहें।
कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य रजनी पाटिल ने भी इस पहल का समर्थन किया और कहा कि हम इसका स्वागत करते हैं। राजीव गांधी ने महिलाओं के आरक्षण की नींव रखी थी, जिसे भुलाया नहीं जा सकता।
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने कहा कि यह बिल काफी पहले पास हो गया था, लेकिन अब इसका जमीन पर सही तरीके से क्रियान्वयन होना जरूरी है। मुझे खुशी है कि सरकार इस पर विचार कर रही है।
अगर यह बिल लागू हो जाता है, तो भारत की राजनीतिक तस्वीर काफी बदल सकती है। लोकसभा में सीटों की संख्या वर्तमान में 543 से बढ़कर लगभग 816 हो सकती है, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नए आरक्षण से मौजूदा सदस्यों को नुकसान न पहुंचे, जो ज्यादातर पुरुष हैं। यह बदलाव संसद में अधिक समावेशी और संतुलित संरचना लाएगा।
लोकसभा में बहुमत के लिए जरूरी संख्या भी अब बढ़कर 409 हो जाएगी। वर्तमान में एनडीए के पास अकेले इस संशोधन को पास कराने के लिए आवश्यक संख्या नहीं है, लेकिन सरकार इसे चालू बजट सत्र के दौरान पास कराने के लिए पूरी कोशिश कर रही है, जो 4 अप्रैल को समाप्त होने वाला है।
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Created On :   24 March 2026 3:32 PM IST











