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जानिए 3 इफेक्ट: सब्जियां धड़ाम क्यों हुई धड़ाम? थोक में 2 रुपए किलो टमाटर, फूल व पत्ता गोभी के खरीदार नहीं

Nagpur News. पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के संकट के कारण उत्पन्न सिलेंडर की किल्लत के बीच हरी सब्जियों के दाम कौड़ियों के भाव रह गए हैं। सब्जी आढ़तिया अविनाश भैसे ने बताया कि मंडी में लोकल सब्जियों की भरपूर आवक हाे रही है। बाजार में टमाटर को 1-2 रुपए और पत्ता गोभी को 3 रुपए किलो के भाव पर भी कोई नहीं पूछ रहा। ऐसे में सब्जी को वापस गांव ले जाने का परिवहन खर्च वहन करना मुमकिन नहीं है। मजबूरी में किसान अपनी सब्जियां उन चरवाहों को बेच रहे हैं, जो अपने भेड़-बकरियों और मवेशियों को चराने के लिए मंडी के आसपास जमा होते हैं।
इस कारण आई यह नौबत
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण मध्यम वर्गीय परिवारों और रेस्टोरेंट्स ने खाना पकाने के खर्च में कटौती की है। मांग में भारी गिरावट आने से कलमना और कॉटन मार्केट जैसी बड़ी मंडियों में सब्जियों का स्टॉक जमा हो गया है, जिससे कीमतें औंधे मुंह गिर गई हैं।
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10 रुपए में 3-4 किलो सब्जियां
थोक बाजार में टमाटर महज 1 से 2 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। वहीं, पत्ता गोभी 3 रुपए और फूल गोभी 5 रुपए प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। मेथी, पालक और बैंगन जैसी जरूरी सब्जियां भी 10 रुपए के आंकड़े को पार नहीं कर पा रही हैं।
होटल और मेस ने खड़े किए हाथ
नागपुर शहर के आधे से ज्यादा छोटे होटल, मेस और ढाबे गैस सिलेंडर न मिलने के कारण या तो बंद हैं या सीमित क्षमता में चल रहे हैं। थोक बाजार के विशेषज्ञ रामभाऊ (आढ़तिया) बताते हैं कि, "जब चूल्हा ही नहीं जलेगा, तो सब्जी कौन खरीदेगा?
वजह को ऐसे समझें
परिवहन का घाटा : 2 रुपए किलो की सब्जी बेचने पर किसान को मंडी तक लाने का किराया भी जेब से देना पड़ रहा है।
बर्बादी की कगार : मेथी, पालक जैसी हरी सब्जियां एक दिन से ज्यादा नहीं टिकतीं, इसलिए उन्हें जानवरों को खिलाया जा रहा है।
मांग शून्य : घरेलू खपत के साथ-साथ थोक खरीदारों (कैटरर्स) के ऑर्डर 80% तक गिर गए हैं।
Created On :   24 March 2026 6:37 PM IST











