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संकट: गैस के बाद पेट्रोल-डीजल की भी मारा-मारी, एलपीजी की कमी ने छीनी हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी

Nagpur News. उपराजधानी नागपुर में रसोई गैस के संकट के बाद अब पेट्रोल और डीजल को लेकर भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। मंगलवार को भी पंपों पर लंबी कतारें दिखाई दी। कुछ पंप बंद भी नजर आए, लोगों में तेल भराने की जल्दबाजी हर तरह देखी गई। इससे पहले सोमवार को शहर में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बंद होने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग पेट्रोल पंपों की ओर दौड़ पड़े। ईंधन खत्म होने के डर से कई पंपों पर देर रात तक लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। लोगों में जल्द से जल्द पेट्रोल-डीजल भरवाने की होड़ मच गई। कई जगहों पर वाहन चालकों को लंबे समय तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा।
नए नियम बने मुसीबत
महाराष्ट्र पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित गुप्ता ने बताया कि तेल कंपनियों द्वारा पेट्रोल पंप डीलर्स के लिए रिवॉल्विंग क्रेडिट और ड्राफ्ट ऑन डिलीवरी जैसी शॉर्ट-टर्म क्रेडिट सुविधाएं फिलहाल बंद कर दी गई हैं। अब ज्यादातर मामलों में एडवांस पेमेंट के आधार पर ही फ्यूल की सप्लाई की जा रही है। पहले डीलर्स को 3 से 5 दिन का क्रेडिट मिल जाता था, जिससे वे बिक्री के बाद भुगतान कर पाते थे। लेकिन नई व्यवस्था में पहले पैसा जमा करना जरूरी हो गया है। इससे कई पेट्रोल पंप संचालकों को कैश फ्लो की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। रोजमर्रा के संचालन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
दौड़ते रहे वाहनधारक
गुप्ता के मुताबिक नागपुर शहर में कुल 106 पेट्रोल पंप संचालित होते हैं। इनसे रोजाना औसतन 5 लाख लीटर से अधिक पेट्रोल-डीजल की खपत होती है। तेल कंपनियों ने इस साल डीलरों को उतनी ही मात्रा में ईंधन देने का नियम बनाया है, जितना पिछले वर्ष इसी माह दिया गया था। हालांकि मौजूदा समय में लोगों के बीच पैनिक बाइंग शुरू हो गई है। इसके कारण कई पेट्रोल पंप आधे दिन में ही ड्राई होने लगे हैं। एक पंप पर ईंधन खत्म होने के बाद वाहन चालक दूसरे पंप की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे शहर के कई पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई है।
पंपों पर नकद भुगतान की मांग
इस बीच शहर के कई पेट्रोल पंपों पर ऑनलाइन भुगतान बंद होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि पेट्रोल या डीजल भरवाने के बाद पंप संचालक डिजिटल पेमेंट स्वीकार नहीं कर रहे और केवल नकद भुगतान की मांग कर रहे हैं।
कई औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन ठप- एलपीजी की कमी ने छीनी हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी
लॉकडाउन जैसी स्थिति - बिना वेतन अस्थायी अवकाश पर कर्मचारियों को भेजा घर
50% स्टाफ की छुट्टी
हिंगना एमआईडीसी की एक बड़ी कंटेनर निर्माण कंपनी हर महीने करीब 40 से 50 टन एलपीजी गैस का उपयोग करती है। मौजूदा समय में गैस सप्लाई रुकते ही कंपनी की पूरी उत्पादन प्रक्रिया अचानक ठप हो गई। सामान्य दिनों में यहां 410 से अधिक कर्मचारी और मजदूर काम करते हैं। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमारे पास कई बड़ी कंपनियों के ऑर्डर पड़े हैं। गैस नहीं होने के कारण उत्पादन रोकना पड़ा। मजबूरन हमें 50 फीसदी से अधिक कर्मचारियों को अस्थायी छुट्टी पर भेजना पड़ा। अगर स्थिति ऐसी ही रही तो आगे और लोगों को हटाना पड़ सकता है।
Created On :   24 March 2026 6:00 PM IST











