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बड़ा निशाना: सपकाल और आंबेडकर ने सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत पर दागा सवाल, कहा - एपस्टिन फाइल पर पीएम माेदी से जवाब मांगे, अन्यथा लें इस्तीफा

Nagpur News. एपस्टिन फाइल को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. भागवत को भूमिका स्पष्ट करने की मांग कांग्रेस व वंचित बहुजन आघाड़ी ने की है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल व वंचित बहुजन आघाड़ी के संयोजक प्रकाश आंबेडकर ने सरसंघचालक पर सवाल दागा है। दोनों नेताओं ने मांग की है कि एपस्टिन फाइल को लेकर सरसंघचालक प्रधानमंत्री से जवाब मांगे या उनसे इस्तीफा लें। सोमवार को कांग्रेस व वंचित आघाड़ी के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा निकाला गया। संविधान चौक से संघ मुख्यालय के लिए निकले इस मोर्चे को मॉरिस कालेज के पास रोका गया। इसी दौरान सपकाल व आंबेडकर संबोधित कर रहे थे।
कह दो मोदी पर अंकुश नहीं, अन्यथा इस्तीफा लें : सपकाल
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि एपस्टिन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आना गंभीर व शर्मनाक है। उस फाइल में जिनके नाम आए उनमें से विश्व के गई लोगों ने इस्तीफे दिए। कुछ को गिरफ्तार किया गया। भारत में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। संघ,संस्कार व नैतिकता की बात करता है। प्रधानमंत्री मोदी 11 साल बाद संघ के रेशमबाग भवन में आकर कह गए कि वे स्वयंसेवक हैं। सत्ता के मामले में संघ की भूमिका सर्वेसर्वा की दर्शाई जाती है, लेकिन सरसंघचालक ने 75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति की जो बात रखी, उसे प्रधानमंत्री मोदी ने नहीं मानी। ऐसे में संघ साफ कह दे कि उसका मोदी पर अंकुश नहीं रह गया है, अन्यथा मोदी से इस्तीफा लें। सपकाल ने आगे कहा-हम केवल विरोध करने नहीं आए हैं। संविधान को मानते हैं। सरसंघचालक को संविधान व तिरंगा सौंपने के लिए आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के साथ दबाव में समझौते कर रहे हैं। आपरेशन सिंदूर को भी अमेरिका के फोन पर रोका गया था।
विचारधारा अलग लेकिन भारतीय होने के नाते साथ आए : प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्र सरकार अमेरिका के दबाव में काम कर रही है। देश को गुलाम बनाने का प्रयास किया जा रहा है। एपस्टिन फाइल में नाम आने से प्रधानमंत्री ने देश के स्वाभिमान को बेचने का प्रयास किया है। ऐसे में उन्हें पद से अलग करने के लिए संघ को हमारे साथ आना चाहिए। आंबेडकर ने कहा-हमारी विचारधारा अलग है, लेकिन हम सब भारतीय है। देश को बचाना सभी भारतीय की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ईरान भारत का मित्र रहा है। ईरान कहता रहा है कि कश्मीर भारत का हिस्सा है। प्रत्येक संकट में ईरान ने भारत का साथ दिया। कनाडा समान छोटा देश भी अमेरिका की धमकियों से नहीं घबराया। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री क्यों घबरा रहे हैं? उन्होंने कहा कि सरसंघचालक डॉ.भागवत से मिलने के लिए उन्हें सूचना दी गई थी। फिर भी वे दिल्ली रवाना हो गए। मोर्चा में वंचित आघाड़ी के नेता हर्षवर्धन पुंडकर,विधायक विकास ठाकरे, विधायक साजिद खान पठान, पूर्व मंत्री अनीस अहमद, कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अतुल कोटेचा, सुरेश भोयर, संदेश सिंगलकर सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।
ध्यान भटकाने खरात फाइल का शोर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री पर कसा तंज
एपस्टिन फाइल को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि एपस्टिन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम आने से किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। महाराष्ट्र में अशोक खरात प्रकरण उजागर हुआ है। एपस्टिन फाइल से ध्यान भटकाने के लिए खरात फाइल का शोर तो नहीं मचाया जा रहा है। सोमवार को संयुक्त मोर्चा आंदोलन के दौरान सपकाल ने पत्रकारों से चर्चा की।
...क्या नींद में थे
सपकाल ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दावा कर रहे हैं कि नाशिक के विकृत मानसिकता के भोंदूबाबा अशोक खरात के प्रकरण को उन्होंने उजागर किया। मुख्यमंत्री के प्रत्येक शब्द में अहंकार भरा हुआ दिखता है। वे औरों को मूर्ख समझते हैं। 5 वर्ष के मुख्यमंत्री कार्यकाल में फडणवीस ही गृहमंत्री थे। तब क्या वे नींद में थे। खरात प्रकरण में आलोचना होने पर रूपाली चाकणकर को महिला आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा। चाकणकर को पश्चाताप नहीं हुआ है। उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा नहीं दिया है। एपस्टिन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का नाम आने से प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने सरेंडर हुए हैं। दबाव में आकर व्यापार करार किया गया है। ईंधन की कमी पर प्रधानमंत्री नहीं बोल रहे हैं।
पुलिस पर दबाव
सपकाल ने कहा कि कांग्रेस व वंचित बहुजन आघाड़ी के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा को रोकने के लिए गृहमंत्री ने पुलिस पर दबाव डाला है। मोर्चा निकालने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री व गृहमंत्री के दबाव में पुलिस ने संघ कार्यालय पर मोर्चा ले जाने की अनुमति नहीं दी। उन्हें लग रहा था कि संघ मुख्यालय पर मोर्चा पहुंचेगा, तो भाजपा की देश भर में दिक्कत होगी। इस मोर्चा के बाद भी संविधान के सम्मान में संघर्ष जारी रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की मांग कायम रहेगी।
मोर्चे ने रोकी शहर की रफ्तार घंटों जाम में फंसे रहे लोग
वंचित बहुजन आघाड़ी द्वारा संविधान चौक से निकाले गए विशाल मोर्चे ने शहर की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया। प्रशासन द्वारा पहले से मार्ग परिवर्तन किए जाने के बावजूद दोपहर से लेकर शाम करीब 5 बजे तक शहर के कई प्रमुख मार्गों पर भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। संविधान चौक, गणेश टेकड़ी मार्ग, मॉरिस कॉलेज मार्ग, आकाशवाणी चौक, लिबर्टी चौक और एलआईसी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दोपहिया से लेकर चारपहिया व अन्य वाहन सड़क पर घंटों जाम में फंसे रहे। कई लोग जरूरी काम, ऑफिस और अस्पताल तक समय पर नहीं पहुंच सके। ट्रैफिक जाम में फंसे लोगों के लिए यह अनुभव बेहद परेशान करने वाला रहा। तेज धूप, वाहन का शोर, बढ़ता प्रदूषण और समय की बर्बादी ने लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से थका दिया। कुछ लोग गाड़ियों में बैठे-बैठे थक चुके थे, तो कुछ ने वैकल्पिक रास्ते खोजने की कोशिश की, लेकिन हर ओर जाम ही जाम नजर आया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यातायात पुलिस ने पहले ही मार्ग परिवर्तन कर दिया था, तो फिर जाम की ऐसी स्थिति क्यों बनी? क्या वैकल्पिक मार्गों की क्षमता का सही आकलन नहीं किया गया? या फिर मौके पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती नहीं थी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस की योजना कागजों तक ही सीमित रही और जमीन पर उसका सही क्रियान्वयन नहीं हो पाया। कई स्थानों पर ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी नजर नहीं आए, जिससे हालात और बिगड़ते गए।
Created On :   24 March 2026 7:14 PM IST












