बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता मार्केट एक्सपर्ट

बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता मार्केट एक्सपर्ट
बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें अब वित्तीय बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई हैं। महंगाई का खतरा, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश की निकासी से शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ रहा है। यह बात कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत एस. चौहान ने सोमवार को न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कही।

मुंबई, 18 मई (आईएएनएस)। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें अब वित्तीय बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई हैं। महंगाई का खतरा, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश की निकासी से शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ रहा है। यह बात कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत एस. चौहान ने सोमवार को न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कही।

आईएएनएस से बात करते हुए मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और फिलहाल राहत के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सप्ताहांत के दौरान भी तेल की कीमतों में करीब 2 से 3 डॉलर की और बढ़ोतरी हुई है।

चौहान ने कहा, "जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, तब तक महंगाई की चिंता वैश्विक बाजारों पर हावी रहेगी।"

उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ते महंगाई के दबाव के कारण बॉन्ड यील्ड में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, खासकर अमेरिका में।

पिछले सप्ताह के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए चौहान ने कहा कि अमेरिका में 10 साल, 20 साल और 30 साल की अवधि वाले बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल देखने को मिला।

उन्होंने कहा, "ये बॉन्ड यील्ड अब असाधारण स्तर की ओर बढ़ रही हैं। जब भी ऐसा ट्रेंड बनता है, बॉन्ड बाजार में बड़े निवेश आने लगते हैं।"

आईएएनएस से बातचीत के दौरान चौहान ने समझाया कि विकसित देशों के बॉन्ड में ज्यादा रिटर्न मिलने से भारत जैसे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी बढ़ जाती है, क्योंकि वैश्विक निवेशक अमेरिका और जापान जैसे बाजारों के सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट्स की ओर रुख करते हैं।

उन्होंने कहा, "इन वैश्विक चुनौतियों के कारण भारतीय शेयर बाजार निकट भविष्य में सीमित दायरे में रह सकते हैं।"

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का संबंध वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों से है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और ज्यादा दिखाई देने लगेगा।

चौहान ने यह भी बताया कि महंगे कच्चे तेल की वजह से कई देशों की मुद्राएं कमजोर हो रही हैं, जिससे ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ गई है।

उन्होंने कहा, "महंगा कच्चा तेल, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश की लगातार निकासी मिलकर भारत समेत वैश्विक शेयर बाजारों के लिए चुनौतीपूर्ण माहौल बना रहे हैं।"

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Created On :   18 May 2026 8:23 PM IST

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