रोहित पवार ने महाराष्ट्र सीईटी में 2,300 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप लगाया

मुंबई, 3 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने मंगलवार को महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) परीक्षा और केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया में 2,300 करोड़ रुपए के गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और मामले की तत्काल न्यायिक जांच की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पवार ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और महाराष्ट्र सीईटी आयुक्त दिलीप सरदेसाई को निशाना बनाया और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की।
पवार ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी, एडुस्पार्क और उसकी सहयोगी कंपनियों ने धांधली और हेरफेर वाली निविदा प्रक्रियाओं के माध्यम से आकर्षक सरकारी ठेके हासिल किए।
उनके अनुसार, ये ठेके सीईटी परीक्षा प्रबंधन, कौशल विकास परियोजनाओं, शैक्षिक सॉफ्टवेयर और कई राज्य विभागों में बुनियादी ढांचा सेवाओं से संबंधित थे।
पवार ने कहा कि सीईटी सेल एक सरकारी विभाग है, एमपीएससी की तरह स्वायत्त निकाय नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने प्रत्यक्ष सरकारी जवाबदेही पर जोर दिया।
उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई इसमें शामिल है, तो वह पूर्व मंत्री और वर्तमान उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल और उनसे जुड़ा कोई व्यक्ति हो सकता है। उन्होंने जल्द ही सोशल मीडिया पर उस अज्ञात सहयोगी की पहचान उजागर करने का वादा किया।
आरोपों को और बल देते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद एक शिक्षक ने दावा किया कि उन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन चलाया था जिसमें एक ऐसी एजेंसी का पर्दाफाश हुआ था जो प्रति छात्र 25 लाख रुपए लेकर सीईटी परीक्षा में शीर्ष परिणाम की गारंटी देती थी।
पवार ने पुलिस और राज्य अधिकारियों की पहले से प्रस्तुत साक्ष्यों को नजरअंदाज करने के लिए आलोचना की।
उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले शिक्षकों के लिए राज्य सुरक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि मुखबिरों द्वारा पिंपरी-चिंचवाड़ पुलिस आयुक्त कार्यालय को दस्तावेजी सबूत सौंपे जाने के बावजूद कोई प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज नहीं की गई है।
उन्होंने सीईटी अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रगति और विश्वसनीयता पर संदेह व्यक्त किया।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए पवार ने राज्य सरकार के समक्ष प्रमुख मांगें रखीं।
उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एडुस्पार्क और उसकी सहयोगी कंपनियों को दिए गए सभी ठेकों की तत्काल उच्च स्तरीय न्यायिक जांच और व्यापक फोरेंसिक ऑडिट का आदेश देना चाहिए। आगामी मार्च में होने वाली सीईटी परीक्षाएं ऑफलाइन मोड में आयोजित की जानी चाहिए ताकि सॉफ्टवेयर में हेराफेरी और डिजिटल कदाचार को रोका जा सके।
पवार ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार 10 दिनों के भीतर निर्णायक कार्रवाई करने में विफल रहती है, तो विपक्ष इस मुद्दे को पूरे राज्य में राजनीतिक रूप से उठाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए कि उच्च और तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल के कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि शिकायतकर्ता को सभी सबूत सक्षम जांच एजेंसियों को औपचारिक रूप से सौंप देने चाहिए, और आश्वासन दिया कि आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी।
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