केरल में सतीशन सरकार ने तेज किया जवाबदेही अभियान, अब केएमएससीएल भी जांच के घेरे में
तिरुवनंतपुरम, 18 जुलाई (आईएएनएस)। सत्ता संभालने के महज दो महीने के भीतर वी.डी. सतीशन सरकार ने पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के दौरान लिए गए फैसलों और विभिन्न सरकारी संस्थानों की व्यापक समीक्षा तेज कर दी है। इसे सरकार के बड़े जवाबदेही अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
इस अभियान की शुरुआत राज्य की वित्तीय स्थिति पर जारी श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) से हुई, जिसमें केरल की आर्थिक स्थिति को गंभीर बताते हुए पिछले कई वर्षों के दौरान वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाए गए। सरकार ने इसी के साथ पूर्ववर्ती सरकार के फैसलों की जांच का संकेत भी दिया।
इसके बाद सरकार का ध्यान केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (केआईआईएफबी) की ओर गया। सरकार ने इसके कामकाज, उधारी और वित्तीय प्रतिबद्धताओं की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया। केआईआईएफबी का ऑफ-बजट फंडिंग मॉडल लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रहा है।
इसके बाद केरल लोक सेवा आयोग (पीएससी) में राज्य योजना बोर्ड की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया। आरोप है कि 10 प्रश्नों के उत्तरों का मूल्यांकन किए बिना ही मेरिट सूची तैयार कर दी गई थी। इस मामले की जांच फिलहाल क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (एसआईटी) कर रही है। जांच एजेंसी ने प्रश्नपत्र, उत्तर कुंजी, अभ्यर्थियों की सूची और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं।
अब केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (केएमएससीएल) भी जांच के दायरे में आ गया है। सरकारी अस्पतालों के लिए दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद करने वाली इस एजेंसी के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक जांच के आदेश दिए हैं।
जांच की वजह ऐसे दस्तावेज हैं, जिनसे पता चला है कि कोविड-19 महामारी और राज्य की गंभीर वित्तीय तंगी के दौर में भी केएमएससीएल ने तिरुवनंतपुरम टेनिस क्लब की 25 वर्ष की कॉर्पोरेट सदस्यता लेने के लिए सार्वजनिक धन से 19 लाख रुपये खर्च किए।
जांच के दौरान केएमएससीएल से जुड़े पुराने विवाद भी फिर चर्चा में आ गए हैं। निगम पर लोक सेवा आयोग को रिक्तियों की जानकारी दिए बिना और रोजगार कार्यालय के माध्यम से अधिसूचना जारी किए बिना 186 नियुक्तियां करने के आरोप लगे थे, जिसे विपक्ष ने कथित 'बैकडोर भर्ती' बताया था।
इसके अलावा पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल में केएमएससीएल के गोदामों में कुछ ही दिनों के अंतराल पर लगी आग की घटनाएं भी एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। इन घटनाओं में बड़ी मात्रा में दवाइयां और चिकित्सा सामग्री नष्ट हो गई थी। उस समय विपक्ष ने आरोप लगाया था कि महामारी के दौरान खरीद में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े सबूत मिटाने के लिए ऐसा किया गया हो सकता है। हालांकि इन आरोपों की अब तक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार हुई आगजनी की घटनाओं ने निगम के कामकाज पर सवाल जरूर खड़े किए थे।
श्वेत पत्र, केआईआईएफबी की समीक्षा, पीएससी भर्ती विवाद की क्राइम ब्रांच जांच और अब केएमएससीएल की जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि वी.डी. सतीशन सरकार पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार के प्रमुख फैसलों और संस्थानों की व्यवस्थित तरीके से समीक्षा कर रही है।
इस बीच, जल्द ही रीबिल्ड केरल इनिशिएटिव (आरकेआई) भी जांच के दायरे में आ सकता है। वर्ष 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद गठित इस पहल को विश्व बैंक से बड़ा ऋण मिला था। अब उस धनराशि के उपयोग और उससे जुड़े कार्यों की जवाबदेही की भी जांच किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
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Created On :   18 July 2026 4:13 PM IST












