केदारनाथ यात्रा पर सारा अली खान को निशाना बनाना गलत स्वामी चिदानंद सरस्वती

केदारनाथ यात्रा पर सारा अली खान को निशाना बनाना गलत स्वामी चिदानंद सरस्वती
परमार्थ निकेतन आश्रम के आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती ने शुक्रवार को उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में प्रार्थना करने को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के खिलाफ एक मुस्लिम धर्मगुरु द्वारा जारी फतवे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले किसी भी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ जारी नहीं किए जाने चाहिए जो 'सद्गुण के मार्ग' पर चल रहा हो।

हरिद्वार, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। परमार्थ निकेतन आश्रम के आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती ने शुक्रवार को उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में प्रार्थना करने को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान के खिलाफ एक मुस्लिम धर्मगुरु द्वारा जारी फतवे का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले किसी भी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ जारी नहीं किए जाने चाहिए जो 'सद्गुण के मार्ग' पर चल रहा हो।

अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सारा अली खान के खिलाफ फतवा जारी कर उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर में उनकी यात्रा और प्रार्थना को शरिया कानून के तहत 'हराम' और 'नाजायज' घोषित किया है।

हरिद्वार में पत्रकारों से बात करते हुए स्वामी सरस्वती ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि किसी के भी खिलाफ फतवे जारी नहीं किए जाने चाहिए। अगर किसी ने पाप किया है, तो चिंता समझ में आती है। लेकिन सद्गुण के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के खिलाफ फतवा जारी करना समझ से परे है।

उन्होंने कहा कि मुझे सारी जानकारी तो नहीं है, लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि जो भी अच्छा काम करता है, सकारात्मक मार्ग अपनाता है, समाज के कल्याण के लिए काम करता है, या दूसरों की मदद करता है, उसकी सराहना की जानी चाहिए, न कि उसे ‘फतवों’ से निशाना बनाया जाना चाहिए।

इस बीच, अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यह मुस्लिम धर्मगुरुओं का मामला है। वे अपनी समुदाय की महिलाओं को (मंदिरों में जाने से) रोक सकते हैं।

हमने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि इस्लाम मानता है कि मुस्लिम लड़कों को हमारे डांडिया उत्सव में भाग लेना चाहिए, तो केवल लड़के ही क्यों? उनके पूरे परिवार क्यों नहीं भाग ले सकते? उनकी बेटियां भी क्यों नहीं शामिल हो सकतीं?

संत ने मद्रास हाई कोर्ट में उस फैसले का हवाला भी दिया जिसमें कहा गया है कि आगमिक हिंदू मंदिर पर्यटन स्थल नहीं बल्कि तीर्थस्थल हैं। उन्होंने कहा कि सारा अली खान के मामले में... लोग आस्था रखने पर दर्शन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अपनी आस्था प्रदर्शित करनी होगी।

गौरतलब है कि मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने फैसला सुनाया है कि अन्य धर्मों के धार्मिक चिन्ह धारण करने वाले और संबंधित देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त न करने वाले गैर-हिंदुओं को आगमिक मंदिरों के परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे ध्वज स्तंभ के आसपास के क्षेत्रों से परे मौजूदा प्रतिबंधों का विस्तार हुआ है।

गुरुवार को, बॉलीवुड अभिनेत्री को 'फतवा' जारी करने वाले मौलाना बरेलवी ने अपने फैसले का बचाव किया।

आईएएनएस से ​​बात करते हुए धर्मगुरु ने कहा कि मुझे जानकारी मिली है कि फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान ने केदारनाथ मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की। अगर उन्होंने सचमुच दिल से ऐसा किया है, तो उन पर शरीयत के नियम लागू होते हैं, क्योंकि वह मुस्लिम हैं, और एक मुस्लिम के लिए मंदिर जाना और पूजा-अर्चना करना शिर्क (बहुदेववाद) की श्रेणी में आता है। यह 'नजायज' (अनुमति योग्य नहीं) और 'हराम' (निषिद्ध) है।

उन्होंने कहा कि सारा अली खान ने एक निंदनीय और निषिद्ध कार्य किया है। इसलिए, शरीयत के अनुसार, उन्हें 'तौबा' (पश्चाताप) करना आवश्यक है।

संयोगवश, सारा अली खान बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान और उनकी पूर्व पत्नी अमृता सिंह की बेटी हैं।

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