इंडिया-यूके ट्रेड डील ऐतिहासिक, घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए भाजपा प्रवक्ता रोहन गुप्ता

इंडिया-यूके ट्रेड डील ऐतिहासिक, घुसपैठ के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए भाजपा प्रवक्ता रोहन गुप्ता
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहन गुप्ता ने भारत-यूके ट्रेड डील को एतिहासिक करार दिया। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के परिसीमन संबंधी बयान, असम-बांग्लादेश घुसपैठ के मुद्दे, पश्चिम बंगाल की ओबीसी सूची में 77 मुस्लिम समुदायों को शामिल किए जाने और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर टिप्पणी की। तमाम मुद्दों पर भाजपा का पक्ष रखते हुए उन्होंने विपक्ष पर अवसरवादी राजनीति और तुष्टीकरण का आरोप लगाया।

अहमदाबाद, 15 जुलाई (आईएएनएस)। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रोहन गुप्ता ने भारत-यूके ट्रेड डील को एतिहासिक करार दिया। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम के परिसीमन संबंधी बयान, असम-बांग्लादेश घुसपैठ के मुद्दे, पश्चिम बंगाल की ओबीसी सूची में 77 मुस्लिम समुदायों को शामिल किए जाने और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर टिप्पणी की। तमाम मुद्दों पर भाजपा का पक्ष रखते हुए उन्होंने विपक्ष पर अवसरवादी राजनीति और तुष्टीकरण का आरोप लगाया।

भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते का स्वागत करते हुए रोहन गुप्ता ने इसे देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए किसी एक देश पर अत्यधिक आर्थिक निर्भरता देश के हित में नहीं होती। हाल के समय में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में कुछ चुनौतियाँ देखने को मिलीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारत को अपने निर्यात के लिए नए और मजबूत वैश्विक बाजार विकसित करने होंगे। मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं और यूके के साथ हुआ यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा। इससे भारत के निर्यात को और गति मिलेगी तथा वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की पहचान और मजबूत होगी। यह समझौता आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम द्वारा यह दावा किए जाने पर कि भाजपा परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए एनसीपी (शरद पवार गुट) और डीएमके का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है, रोहन गुप्ता ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले अपने राजनीतिक आचरण पर आत्ममंथन करे। कांग्रेस ने समय-समय पर अपने सहयोगी दलों के साथ भरोसे का रिश्ता कायम नहीं रखा और अवसर आने पर उन्हें निराश किया। आज विपक्षी गठबंधन के कई दल भी कांग्रेस की कार्यशैली को समझ चुके हैं। कांग्रेस अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देती है, इसलिए उसे दूसरों को सलाह देने से पहले अपनी स्थिति पर विचार करना चाहिए।

असम-बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी केंद्र या भाजपा शासित राज्य सरकारें अवैध घुसपैठ रोकने के लिए सख्त कदम उठाती हैं, तब विपक्ष उसका विरोध करने लगता है। सीमा पर बाड़बंदी (फेंसिंग) और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाते, तो घुसपैठ जैसी समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता था। उन्होंने आगे कहा कि घुसपैठिए का कोई धर्म नहीं होता और यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। भाजपा सीमा सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी और जहां भी आवश्यक होगा, वहां अवैध घुसपैठ रोकने तथा कानून के अनुसार कार्रवाई करने का काम जारी रहेगा।

पश्चिम बंगाल की ओबीसी सूची में 77 मुस्लिम समुदायों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर रोहन गुप्ता ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं करता। इस विषय पर न्यायिक प्रक्रिया भी हो चुकी है और अब इस मुद्दे पर लोगों को भ्रमित करने के बजाय संविधान की भावना के अनुरूप निर्णय होने चाहिए। आज देश में तुष्टीकरण की नहीं, बल्कि सशक्तीकरण की राजनीति की आवश्यकता है। केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं का लाभ सभी पात्र नागरिकों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए और किसी भी वर्ग को केवल राजनीतिक लाभ के लिए अलग संदेश नहीं दिया जाना चाहिए।

मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद पर रोहन गुप्ता ने विपक्ष पर अवसरवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के मुद्दे पर कई नेता चुनाव के समय स्वयं को हिंदू या सनातनी बताने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब मथुरा जैसे विषयों पर उनका रुख पूछा जाता है तो वे स्पष्ट जवाब देने से बचते हैं। जनता अब ऐसी राजनीति को समझ चुकी है। सनातन पर आस्था रखने वाले लोग अपने विचारों में निरंतरता रखते हैं, जबकि चुनावी लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों का इस्तेमाल करने वालों की वास्तविक सोच समय के साथ सामने आ जाती है। जनता अब अवसरवादी राजनीति और वास्तविक वैचारिक प्रतिबद्धता के बीच अंतर को पहचानने लगी है।

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Created On :   15 July 2026 8:27 PM IST

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