जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग, भूख हड़ताल पर पांच छात्र

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग, भूख हड़ताल पर पांच छात्र
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रों की मांग है कि चुनाव कराने के लिए कमेटी गठित की जाए, चुनाव की तारीख घोषित हो और प्रक्रिया को बिना देरी शुरू किया जाए।

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। छात्रों की मांग है कि चुनाव कराने के लिए कमेटी गठित की जाए, चुनाव की तारीख घोषित हो और प्रक्रिया को बिना देरी शुरू किया जाए।

प्रदर्शन में शामिल छात्र अतीक अहमद के मुताबिक, उनके पांच साथी भूख हड़ताल पर हैं, जिनमें चार छात्र और एक छात्रा शामिल हैं।

छात्र अतीक अहमद ने कहा कि हमारी मांग बिल्कुल स्पष्ट है और मीडिया को इसे ठीक से समझना चाहिए। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव हो चुके हैं, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में चुनाव होने है, और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में भी चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। ऐसे में जामिया जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं? छात्रों की मांग है कि चुनाव के लिए एक कमेटी बनाई जाए और तारीख का ऐलान किया जाए। छात्र संघ चुनाव को प्राथमिकता देते हुए इसकी प्रक्रिया जल्द शुरू की जानी चाहिए।

जामिया में लिखे गए 'फ्री कश्मीर' के नारे को लेकर सवाल किए जाने पर अतीक अहमद ने कहा कि इसे किसी शरारती तत्व ने आंदोलन की दिशा भटकाने और मुद्दे को कमजोर करने के उद्देश्य से लिखा था, जिसे तुरंत हटा दिया गया। अतीक ने आरोप लगाया कि इस तरह के पोस्टर या नारे लगाकर आंदोलन को खत्म करने, उसका ध्यान मुख्य मांग से हटाने और भ्रम पैदा करने की कोशिश की जाती है। नारा इस उद्देश्य से भी लिखा गया हो सकता है कि उसकी तस्वीर खींचकर वायरल की जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह का नारा लिखना गलत है और वे इसकी निंदा करते हैं। इस मुद्दे पर छात्रों की बैठक में भी चर्चा हुई है। ऐसी घटनाओं पर नजर रखने के लिए मॉनिटरिंग टीम बनाई जाएगी, जो पूरे मामले की निगरानी करेगी।

प्रदर्शन में शामिल एक अन्य छात्र ने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने और उसमें विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। नारे लिखकर प्रदर्शन को भटकाने की कोशिश की जाती है। विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए छात्र ने कहा कि जामिया में भारी सुरक्षा व्यवस्था है और आने-जाने वाले छात्रों की जांच की जाती है। छात्र ने दावा किया कि विश्वविद्यालय में प्रवेश करते समय 12 सुरक्षाकर्मियों ने उसका पहचान पत्र जांचा। छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि करीब दो महीने पहले प्रवेश मिलने के बावजूद प्रशासन ने उसका दाखिला नहीं लिया था।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने एक सुर में कहा कि उनकी मुख्य मांग छात्र संघ चुनाव बहाल करना है और वे चाहते हैं कि प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाए।

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