झांसी में आधुनिक रोशनी के बीच मिट्टी के दीयों की लौ बरकरार, महंगाई से कुम्हारों की उम्मीदों पर असर

झांसी में आधुनिक रोशनी के बीच मिट्टी के दीयों की लौ बरकरार, महंगाई से कुम्हारों की उम्मीदों पर असर
दीपावली का त्योहार नजदीक आने के बाद बाजारों में रौनक बढ़ी है। घरों को सजाने के लिए रंग-बिरंगी इलेक्ट्रॉनिक झालरें खरीदी जा रही हैं, तो पारंपरिक मिट्टी के दीयों की मांग भी बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के झांसी में कुम्हार परिवार दीपावली के लिए दिन-रात दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां तैयार करने में जुटे हैं। हालांकि, इस बार बढ़ती महंगाई और लागत के बीच उन्हें बिक्री कम होने की चिंता सता रही है।

झांसी, 5 नवंबर (आईएएनएस)। दीपावली का त्योहार नजदीक आने के बाद बाजारों में रौनक बढ़ी है। घरों को सजाने के लिए रंग-बिरंगी इलेक्ट्रॉनिक झालरें खरीदी जा रही हैं, तो पारंपरिक मिट्टी के दीयों की मांग भी बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के झांसी में कुम्हार परिवार दीपावली के लिए दिन-रात दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां तैयार करने में जुटे हैं। हालांकि, इस बार बढ़ती महंगाई और लागत के बीच उन्हें बिक्री कम होने की चिंता सता रही है।

कुम्हारों का कहना है कि उन्होंने त्योहार को देखते हुए बड़ी संख्या में दीये और मूर्तियां तैयार कर रखी हैं, लेकिन बाजार में अपेक्षित खरीदारी नहीं हो रही है। वहीं, महंगाई से जूझ रहे ग्राहक भी सीमित बजट में ही दीपावली की तैयारी कर रहे हैं।

उनका कहना है कि मिट्टी, रंग, ईंधन और अन्य सामान की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो गया है। इसके बावजूद बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं हो रही है। कुम्हारों को चिंता है कि यदि तैयार सामान की बिक्री नहीं हुई तो उनकी मेहनत और पूंजी दोनों प्रभावित होंगी।

किशोरीलाल प्रजापति ने कहा, "एक हजार दीये बनाने में लगभग 200-250 रुपए का खर्चा आता है, लेकिन अभी बिक्री बहुत कम है। एक बार हमें सरकारी योजना के तहत सिर्फ चाक मिला था।" उन्होंने यह भी कहा कि आज के समय में मिट्टी की समस्या सबसे बड़ी है। बर्तन बनाने के लिए उस तरह की मिट्टी नहीं रही है।

एक महिला ने कहा कि एक के समय में मिट्टी के बर्तन बनाने में कई मुश्किलें आती हैं, जिसमें मिट्टी की समस्या सबसे अधिक है। महंगाई होने के कारण बिक्री भी नहीं हो रही है। मेहनत के हिसाब से पैसा नहीं मिल पाता है।

दूसरी ओर, दीपावली की खरीदारी करने पहुंच रहे ग्राहकों के सामने भी महंगाई चुनौती बनी हुई है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों और बढ़ते खर्च के बीच त्योहार का बजट सीमित रखना पड़ रहा है। ऐसे में वे जरूरत के मुताबिक ही दीये, सजावटी सामान और अन्य वस्तुओं की खरीदारी कर रहे हैं।

कुछ लोग पारंपरिक मिट्टी के दीयों को प्राथमिकता दे रहे हैं, तो कुछ आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक लाइटों से घर सजाने की तैयारी में हैं। ग्राहकों के मुताबिक, त्योहार की खुशियां मनाना जरूरी है, लेकिन बढ़ती महंगाई के कारण खरीदारी में कटौती करनी पड़ रही है। एक ग्राहक ने आईएएनएस से कहा, "10 रुपए में 15 दीये मिल रहे हैं। महंगाई के कारण हम दीये भी कम खरीद रहे हैं।

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