ऑनर किलिंग पर अंकुश कर्नाटक सरकार ने 'इवा नम्मावा' बिल पेश किया

ऑनर किलिंग पर अंकुश कर्नाटक सरकार ने इवा नम्मावा बिल पेश किया
कर्नाटक सरकार ने बुधवार को विधानसभा में 'इवा नम्मावा' बिल पेश किया। इसका उद्देश्य ऑनर किलिंग और इंटर-कास्ट या इंटर-कम्युनिटी शादियों में जाति या समुदाय के आधार पर होने वाली हिंसा को रोकना है।

बेंगलुरु, 18 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार ने बुधवार को विधानसभा में 'इवा नम्मावा' बिल पेश किया। इसका उद्देश्य ऑनर किलिंग और इंटर-कास्ट या इंटर-कम्युनिटी शादियों में जाति या समुदाय के आधार पर होने वाली हिंसा को रोकना है।

सरकार ने यह कदम खासकर हुबली में हुई घटना के बाद उठाया है, जिसमें गर्भवती महिला मान्या पाटिल की उसके पिता और रिश्तेदारों ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति से शादी करने पर बेरहमी से हत्या कर दी थी। इस घटना ने समाज में बढ़ती इंटर-कास्ट शादियों से जुड़ी हिंसा को उजागर किया।

प्रस्तावित कानून वयस्कों को अपनी सहमति से शादी करने का अधिकार देता है और परिवार या समुदाय के दबाव से सुरक्षा सुनिश्चित करता है। अपराधियों के लिए यह कानून कम से कम पांच साल की जेल की सजा का प्रावधान करता है।

आईटी, बीटी, और ग्रामीण विकास व पंचायत राज राज्य मंत्री ने विधानसभा में बिल पेश किया। बिल पर आगे चर्चा होगी। बिल का नाम 12वीं सदी के कन्नड़ समाज सुधारक बसवन्ना के वचन पर रखा गया है। यह नाम बराबरी को बढ़ावा देता है और भेदभाव को खारिज करता है।

बिल में धमकियों का सामना कर रहे जोड़ों के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन और सेफ हाउस का प्रावधान किया गया है। इसमें सिर्फ हत्या ही नहीं, बल्कि 'ऑनर क्राइम' की परिभाषा में शारीरिक नुकसान, जबरन शादी या तलाक, और सामाजिक बहिष्कार जैसी घटनाओं को शामिल किया गया है।

अपराधों को कॉग्निजेबल और नॉन-बेलेबल कैटेगरी में रखा गया है, और कुछ गंभीर मामलों में उम्रकैद जैसी कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य लोगों को, खासकर इंटर-कास्ट, इंटर-कम्युनिटी या इंटर-रिलीजियस शादियों में, बिना हिंसा के डर के अपने साथी चुनने का अधिकार देना है।

याद दिलाया जा सकता है कि दिसंबर 2025 में हुबली तालुक में मान्या पाटिल की हत्या के मामले में उसके पिता और दो अन्य लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस बिल के जरिए सरकार ऐसी घटनाओं को रोकने और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

पुलिस के अनुसार, लिंगायत समुदाय की मान्या पाटिल ने दलित विवेकानंद से शादी की थी। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे और एक-दूसरे को पहले से जानते थे। ग्रेजुएशन के दौरान उनके बीच प्यार हो गया और इंस्टाग्राम के जरिए उनका रिश्ता और मजबूत हुआ। इस कपल ने 19 जून, 2025 को हुबली के रजिस्ट्रार ऑफिस में शादी कर ली।

शुरुआती जांच में पता चला कि मान्या पाटिल ने शादी से पहले धमकी दी थी कि अगर विवेकानंद ने उससे शादी नहीं की तो वह आत्महत्या कर लेगी। शादी के बाद पुलिस ने दोनों परिवारों को बुलाकर समझौता करवाया। इसके बाद मान्या और विवेकानंद हावेरी चले गए।

8 दिसंबर, 2025 को वे अपने गांव लौट आए, क्योंकि मान्या प्रेग्नेंट थी और उन्हें लगा कि इससे उनके रिश्ते को परिवार मान लेगा।

हालांकि, दोनों परिवारों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया। हुबली रूरल पुलिस ने फिर से दोनों परिवारों को बुलाया और बड़ों को एक-दूसरे को परेशान न करने की चेतावनी दी। इसके बावजूद, मान्या पाटिल के पिता और रिश्तेदार कथित तौर पर उसके घर में घुसकर उसकी हत्या कर दी। यह घटना इंटर-कास्ट शादी में होने वाली हिंसा और ऑनर क्राइम की गंभीरता को सामने लाती है।

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Created On :   18 March 2026 4:33 PM IST

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