मिसाइल इक्वेशन तय करेगा ईरान, इजरायल और अमेरिका युद्ध का भविष्य जीडी बख्शी
नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। महंगाई, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की दिशा अब 'मिसाइल इक्वेशन' पर टिकी है।
मिडिल ईस्ट में तनाव के जटिल हालातों पर मेजर जनरल जीडी बख्शी (सेवानिवृत्त) ने ईरान, इजरायल और अमेरिका की रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 'मिसाइल इक्वेशन' पर निर्भर है कि लड़ाई कब तक चलेगी और किस ओर चलेगी।
जीडी बख्शी ने बताया कि 'मिसाइल इक्वेशन' का मतलब है कि किसके पास कितने मिसाइल और इंटरसेप्टर हैं, किसके पास कितनी मारक क्षमता बची है, और कौन पहले थकेगा। इसी पर तय होगा कि यह टकराव कितना लंबा चलेगा।
इजरायल या अमेरिका के पास कितने मिसाइल और इंटरसेप्टर हैं, और ईरान के पास इस तरह का कितना जखीरा है? किसका जखीरा पहले खत्म होगा?
जीडी बख्शी ने कहा कि जब जखीर खत्म होने की कगार पर होगा तब यह तो बातचीत होगी या सीजफायर होगा। इसके अलावा, आप अपनी ऊंची क्षमता का उपयोग बंद करके निचली क्षमता से युद्ध करने लगेंगे। फिर महीनों तक एक-दो मिसाइल चलते रहेंगे। 10-15 ड्रोन कई महीनों तक चलते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि अमेरिका जो ख्वाब लेकर बैठा है कि ईरान आत्मसमर्पण करेगा और सत्ता परिवर्तन होगा, वो कभी नहीं होने वाला है।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका का कहना था कि दो दिन में सब खत्म हो जाएगा, लेकिन अब तक नहीं हुआ। पहले दिन अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामनेई को मार दिया और उसके बाद 48 टॉप कमांडर को मार दिया। अमेरिका को उम्मीद थी कि अब तो ईरान गया, लेकिन ईरान अभी भी लगातार हमलावर बना हुआ है।
अमेरिका के लिए समस्या ये है कि ईरान को समझ आ गया है। उसने तोड़ ढूंढ लिया है। ईरान का तोड़ है मोजैक, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और डेलिगेशन। ईरान ने अपनी फोर्स को कह दिया, "आदेश का इंतजार मत करो, जहां मिले हमला करो और मारो। हम सब मारे जाएं तो भी तुम मारते जाओ।"
सुप्रीम लीडर की मौत के आधे घंटे बाद ही ईरान ने हमला कर दिया था, जो आज भी जारी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया। त्राहिमाम मचा हुआ है।
ईरान को तो पहले ही पता था कि हम युद्ध जीत नहीं सकते, लेकिन उसने लड़ाई लड़ने का फैसला लिया, इसलिए कि सनम हम तो डूबेंगे, तुमको भी ले डूबेंगे।
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Created On :   19 March 2026 11:39 PM IST












