एमएमडीआर संशोधन विधेयक से ओडिशा को हर साल 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा बीजद नेता बक्सीपात्रा
भुवनेश्वर, 21 अगस्त (आईएएनएस)। बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ नेता भृगु बक्सीपात्रा ने माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) (एमएमडीआर) संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक संसद में बिना पर्याप्त चर्चा के एकतरफा तरीके से पारित किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस संशोधन से ओडिशा को आर्थिक नुकसान होगा, राज्य के खनिज संसाधनों पर उसका अधिकार कमजोर होगा और खनन पर निर्भर आदिवासी, दलित, किसान और श्रमिक समुदाय सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
आईएएनएस से बातचीत में भृगु बक्सीपात्रा ने कहा कि एमएमडीआर संशोधन विधेयक पिछले सप्ताह संसद में पारित हुआ, लेकिन इस पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में बीजू जनता दल ने इस विधेयक का विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि दो दिन पहले बीजद अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सार्वजनिक रूप से इस विधेयक से ओडिशा को होने वाले नुकसान को विस्तार से रखा। उनके अनुसार ओडिशा के बजट और रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत खनन क्षेत्र है तथा राज्य को माइंस टैक्स और सेस से बड़ी आय होती है। उन्होंने कहा कि इस आय को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं किया जाना चाहिए और बीजू जनता दल के साथ-साथ ओडिशा की जनता भी इस संशोधन का विरोध करेगी।
भृगु बक्सीपात्रा ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है और ओडिशा को होने वाली क्षति के बारे में आवाज उठाना भी राज्य का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के केंद्रीय खनन मंत्री और पार्टी के सांसदों ने नवीन पटनायक पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में बीजद ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के इस संशोधन विधेयक के कारण ओडिशा को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर वर्ष 2005 से 2024 तक माइंस सेस के रूप में ओडिशा को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक मिलने की संभावना थी, लेकिन संशोधन विधेयक के कारण यह राशि जब्त हो गई और अब राज्य को नहीं मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार इस राशि की वसूली कर सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
बीजद नेता ने आरोप लगाया कि भविष्य में भी इस संशोधन विधेयक के कारण ओडिशा को हर साल लगभग 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय नुकसान नहीं है, बल्कि राज्य के खनिज संसाधनों पर अधिकार का भी सवाल है।
उन्होंने कहा कि एमएमडीआर संशोधन के जरिए राज्य की जमीन, खदानों और खनिजों पर अधिकार केंद्र सरकार के हाथों में चला जाएगा। उनके मुताबिक केंद्र सरकार ने ओडिशा से उसका अधिकार छीन लिया है और बीजद इसका लगातार विरोध करेगी।
भृगु बक्सीपात्रा ने कहा कि खनन परियोजनाओं से विस्थापन ओडिशा के लोगों का होता है, जमीन, पानी और बिजली राज्य की है, इसलिए खनिज संपदा पर राज्य का अधिकार भी बना रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर आदिवासी, दलित, किसान, श्रमिक और मजदूर वर्ग पर पड़ेगा, क्योंकि खनन से मिलने वाली आय का उपयोग इन्हीं समुदायों के विकास और कल्याण के लिए किया जाता था।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि 2015 में एमएमडीआर कानून लागू होने के बाद ओडिशा की खनन आय 5 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर 50 हजार करोड़ रुपये हो गई। इस पर बक्सीपात्रा ने कहा कि बीजद ने 2015 के संशोधन का कभी विरोध नहीं किया था, बल्कि उसका स्वागत किया था, क्योंकि उससे ओडिशा समेत सभी खनन राज्यों को लाभ हुआ था।
उन्होंने कहा कि पहले हुए लाभ का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में मिलने वाले राज्य के अधिकार और राजस्व को समाप्त कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र जो कहे, राज्य उसे बिना सवाल माने, यह स्वीकार्य नहीं है।
बीजद नेता ने कहा, "दिल्ली ओडिशा की मालिक नहीं हो सकती। यह बात भाजपा के ओडिशा के सांसदों और मंत्रियों को समझनी चाहिए।"
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता विपक्ष में रहते हुए जिन मुद्दों पर तत्कालीन सरकार का विरोध करते थे, सत्ता में आने के बाद अब वही काम कर रहे हैं।
ओडिशा की वित्तीय स्थिति पर भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए भृगु बक्सीपात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और नीति आयोग तक ओडिशा को सबसे अधिक वित्तीय अनुशासन वाला राज्य मान चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रमाणपत्र ओडिशा के लोगों को मिला है और अब भाजपा राजनीतिक कारणों से उस रिकॉर्ड को नकारने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में नवीन पटनायक के मुख्यमंत्री बनने के समय ओडिशा पर 18 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था। उनके अनुसार 24 वर्षों में राज्य का बजट कई गुना बढ़ने के बावजूद नवीन पटनायक सरकार ने कुल 78 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया।
इसके विपरीत उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन माझी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने केवल दो वर्षों में ही 1 लाख 38 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले लिया है। उन्होंने कहा कि वास्तविक वित्तीय अनुशासनहीनता भाजपा सरकार के कार्यकाल में दिखाई दे रही है।
भृगु बक्सीपात्रा ने कहा कि भाजपा के सांसद और मंत्री पहले अपनी सरकार और मुख्यमंत्री को वित्तीय अनुशासन का पाठ पढ़ाएं, बीजद को नहीं।
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Created On :   21 Aug 2026 6:40 PM IST












