नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन में देवदूत बनी बॉम्बे हॉस्पिटल की स्टाफ नर्स, महिला की सुरक्षित डिलीवरी कराई

नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन में देवदूत बनी बॉम्बे हॉस्पिटल की स्टाफ नर्स, महिला की सुरक्षित डिलीवरी कराई
बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्टाफ नर्स मीनू भैसारे ने चलती नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन में एक महिला की सुरक्षित डिलिवरी कराई। ट्रेन में उनकी सूझबूझ और समर्पण की हर कोई सराहना कर रहा है।

मुंबई, 14 जुलाई (आईएएनएस)। बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्टाफ नर्स मीनू भैसारे ने चलती नागपुर-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस ट्रेन में एक महिला की सुरक्षित डिलिवरी कराई। ट्रेन में उनकी सूझबूझ और समर्पण की हर कोई सराहना कर रहा है।

बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, नर्स मीनू भैसारे 3 जून को ट्रेन की कोच एस5 (सीट नंबर 22) में यात्रा कर रही थीं। रात लगभग 2 बजे साथ यात्रा कर रहीं अंजुम (जो नौ महीने की गर्भवती थीं) को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। यात्रियों ने कई बार मेडिकल मदद पाने की कोशिश की, लेकिन तुरंत मदद नहीं मिल सकी क्योंकि ट्रेन भुसावल जंक्शन से निकल चुकी थी और आगे कोई तय स्टॉप नहीं था। रेलवे कर्मचारियों ने यात्रियों को बताया कि मेडिकल मदद ट्रेन तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट लगेंगे।

गर्भवती महिला की जांच करने पर भैसारे ने पाया बच्चेदानी की थैली पहले ही फट चुकी थी और बच्चे का सिर बाहर आने लगा था, जिससे पता चला कि डिलीवरी होने ही वाली है। उन्होंने तुरंत जिम्मेदारी संभाली और साथ यात्रा कर रहे यात्रियों की मदद से महिला की प्राइवेसी का ध्यान रखते हुए चलती ट्रेन में सुरक्षित डिलीवरी कराई।

बच्चे के जन्म के बाद भैसारे ने एक साफ धागे से गर्भनाल को सावधानी से क्लैंप किया। साफ सर्जिकल उपकरण न होने पर, एक यात्री ने चाकू दिया, जिसे गर्भनाल काटने से पहले अच्छी तरह साफ किया गया। इसके बाद उन्होंने मां और नवजात शिशु दोनों की देखभाल की। उन्होंने मां को अपने साथ लाए साफ कपड़े पहनने में मदद की, बच्चे को साफ किया और यह पक्का किया कि नवजात शिशु को स्तनपान के लिए सुरक्षित रूप से मां के पास रखा जाए।

बाद में रेलवे अधिकारियों ने चालिसगांव रेलवे स्टेशन पर मेडिकल मदद का इंतजाम किया, जहां मां और नवजात शिशु को आगे की जांच और देखभाल के लिए मेडिकल टीम को सुरक्षित सौंप दिया गया। इसके बाद बाकी यात्रियों ने मुंबई के लिए अपनी यात्रा जारी रखी।

इस घटना के बारे में बात करते हुए मीनू भैसारे ने कहा कि एक नर्स के तौर पर मेरी पहली प्राथमिकता मां और बच्चे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। उस पल में हिचकिचाहट की कोई गुंजाइश नहीं थी। बस आत्मविश्वास और सहानुभूति के साथ काम करने की जिम्मेदारी थी। मैं अपनी सह-यात्री राजश्री नेवारे और उन सभी साथी यात्रियों की बहुत आभारी हूं, जिनके सहयोग, प्रोत्साहन और समय पर मिली मदद से यह सुरक्षित डिलीवरी संभव हो पाई।

बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राजकुमार पाटिल ने कहा कि मीनू भैसारे की मिसाल कायम करने वाली प्रतिक्रिया नर्सिंग पेशे के उच्चतम मानकों को दर्शाती है। उनकी क्लिनिकल काबिलियत, दबाव में शांत रहकर फैसला लेने की क्षमता और मरीजों की देखभाल के प्रति अटूट समर्पण बॉम्बे हॉस्पिटल के मुख्य मूल्यों को दर्शाता है। हमें उनकी निस्वार्थ सेवा पर बहुत गर्व है और हम मानवता के इस असाधारण काम के लिए उन्हें बधाई देते हैं।

यह प्रेरणादायक घटना उस समर्पण, प्रोफेशनलिज़्म और मानवीय भावना का सबूत है जो हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की पहचान है। यह बॉम्बे हॉस्पिटल की नर्सिंग टीम के उस संकल्प को और मजबूत करता है जिसके तहत वे जरूरत पड़ने पर और जहां भी जरूरत हो, सहानुभूतिपूर्ण देखभाल प्रदान करते हैं-चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों।

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Created On :   14 July 2026 6:06 PM IST

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