कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज को कोर्ट से राहत, सोशल मीडिया से वीडियो हटाए जाएंगे

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज को कोर्ट से राहत, सोशल मीडिया से वीडियो हटाए जाएंगे
बॉलीवुड सेलेब्स के बाद अब मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने पर्सनलिटी राइट्स को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। बॉलीवुड सेलेब्स के बाद अब मशहूर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने पर्सनलिटी राइट्स को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए शिकायत में शामिल सभी वीडियो/लिंक्स को यूट्यूब से हटाने का आदेश दिया है।

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का पक्ष पेश करने वाले वकील ने बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर उनके नाम और वीडियो का गलत इस्तेमाल हो रहा है। कुछ जगहों पर उनके वीडियो या एआई से बने कंटेंट को इस तरह दिखाया जा रहा है जैसे वह खुद बोल रहे हों। अनिरुद्धाचार्य के वकील ने दलील दी कि सोशल मीडिया जो सर्कुलेट हो रहा है, उसके चलते लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेंगे।

गूगल की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जहाँ तक यूट्यूब का सवाल है, अगर कोई वीडियो या कंटेंट एआई-जनरेटेड या गलत तरीके से बनाया गया है, तो उसे हटाया जा सकता है। गूगल ने कहा कि जिन लिंक की शिकायत अनिरुद्धाचार्य की ओर गई है, उनमें से कुछ फैन पेज के वीडियो भी हैं। इन वीडियो में अनिरुद्धाचार्य के कुछ पुराने बयान दिखाए गए हैं, जिनमें महिलाओं या विज्ञान से जुड़ी टिप्पणियों पर लोग आलोचना या सवाल उठा रहे हैं। हालांकि इसके साथ ही कथावाचक को राहत देते हुए कोर्ट ने सामाग्री को हटाने का आदेश दे दिया है।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि इस मामले के लिए वृंदावन का होने के बावजूद दिल्ली हाईकोर्ट का रुख क्यों किया, क्यों सभी को दिल्ली से इतना प्यार है। हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया कि देश में और भी अदालतें हैं। अगर वो आदेश पास करेंगी तो क्या गूगल उसे नहीं मानेगा। कलकत्ता से लेकर इलाहाबाद और लखनऊ की अदालतें क्या इसमें आदेश पास नहीं कर सकतीं। दिल्ली से आपको इतना प्रेम क्यों है।

जस्टिस तुषार राव गेड़ेला ने अनिरुद्धाचार्य महाराज से कहा कि आप तो धार्मिक गुरु हैं और आपको तो आलोचना, प्रशंसा या पहचान जैसी बातों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। आपको तो इन सबसे ऊपर होना चाहिए। कोर्ट ने आदि शंकराचार्य का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने कभी आलोचना करने वालों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा नहीं किया है, क्योंकि वे असहमति रखने वालों से तर्क करते है, बहस करते हैं बल्कि कोर्ट में आकर केस नहीं करते। ऐसे में जब तक कोई बात वास्तव में मानहानिकारक हो, तब तक केवल असहमति को गलत नहीं माना जा सकता। अब मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।

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Created On :   30 March 2026 3:44 PM IST

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