ऋषिकेश दा की फिल्मों के वो गाने, जो बने हिंदी सिनेमा की पहचान

ऋषिकेश दा की फिल्मों के वो गाने, जो बने हिंदी सिनेमा की पहचान
हिंदी सिनेमा में कुछ निर्देशक ऐसे हुए हैं, जिन्होंने सिर्फ कहानियां नहीं बल्कि, एहसास पर्दे पर उतारा है। उनमें से एक हैं ऋषिकेश मुखर्जी। उनकी फिल्मों की खास बात यह थी कि उनमें संगीत सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर नहीं आता था, बल्कि वह कहानी के भावों को गहराई से व्यक्त करने का एक जरिया हुआ करता था।

मुंबई, 29 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ निर्देशक ऐसे हुए हैं, जिन्होंने सिर्फ कहानियां नहीं बल्कि, एहसास पर्दे पर उतारा है। उनमें से एक हैं ऋषिकेश मुखर्जी। उनकी फिल्मों की खास बात यह थी कि उनमें संगीत सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर नहीं आता था, बल्कि वह कहानी के भावों को गहराई से व्यक्त करने का एक जरिया हुआ करता था।

'गोलमाल', 'आनंद', 'चुपके चुपके', 'अभिमान' और 'नमक हराम' जैसी फिल्मों के गीतों ने न सिर्फ उस दौर को म्यूजिकल बनाया, बल्कि आज भी हर पीढ़ी की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं।

जीना इसी का नाम है : यह हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध फिल्म 'अनाड़ी' (1959) का एक बेहद लोकप्रिय और प्रेरणादायक गाना है। गाने को गायक मुकेश अपनी शानदार आवाज में गाया है, जबकि शैलेंद्र ने इसके बोल लिखे हैं और शंकर-जयकिशन ने इसका संगीत बनाया था। यह गाना सिखाता है कि असली जिंदगी वही है, जो दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाए और दूसरों के दुख को बांटे।

कहीं दूर जब दिन ढल जाए:1971 की प्रसिद्ध हिंदी फिल्म 'आनंद' का एक बेहद लोकप्रिय गीत है। मुकेश की दर्द भरी आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया है। यह गाना आज भी उदासी और सुकून के पलों में लोगों को बहुत याद आता है। योगेश द्वारा लिखे गए बोल दिल को छू लेने वाले हैं, जो जीवन की तन्हाई और पुरानी यादों को बयां करते हैं।

आने वाला पल जाने वाला है: यह हिंदी सिनेमा का एक बेहद प्रसिद्ध और सदाबहार गीत है, जो जीवन वर्तमान में जीने का संदेश देता है। गुलजार साहब के लिखे शब्द और किशोर कुमार की जादुई आवाज ने इस दार्शनिक गीत को अमर बना दिया है।

तेरी बिंदिया रे- साल 1973 की प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म 'अभिमान' का एक सदाबहार और बेहद लोकप्रिय रोमांटिक गाना है। गाना रिकॉर्ड होने के पीछे भी एक कहानी है, जिसके अनुसार यह गाना शुरुआत में किशोर कुमार को गाना था, लेकिन फिल्म की कहानी उनकी अपनी निजी जिंदगी से कुछ मिलती-जुलती लगी, जिससे वे भावनात्मक रूप से असहज हो गए और उन्होंने लता मंगेशकर के साथ इस गाने को गाने से इंकार कर दिया। किशोर कुमार के इंकार के बाद संगीतकार एस. डी. बर्मन ने यह गाना महान गायक मोहम्मद रफी साहब को दिया, जो बाद में इतिहास का एक बहुत बड़ा सुपरहिट गाना साबित हुआ।

अब के सावन में - किशोर कुमार और लता मंगेशकर के द्वारा गाए इस गीत को किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने मिलकर गाया है। यह एक सदाबहार युगल गीत है जो सावन के मौसम और रोमांस के अहसास को खूबसूरती से बयान करता है।

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Created On :   29 Sept 2026 4:49 PM IST

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