'स्वेच्छा से इस्तीफा दिया या नहीं', इसकी जांच जरूरी थी एआईएडीएमके व्हिप की मद्रास हाई कोर्ट में दलील

स्वेच्छा से इस्तीफा दिया या नहीं, इसकी जांच जरूरी थी एआईएडीएमके व्हिप की मद्रास हाई कोर्ट में दलील
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के व्हिप ने मद्रास हाई कोर्ट में दलील दी कि स्पीकर को एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे तब तक स्वीकार नहीं करने चाहिए थे, जब तक वे यह जांच न कर लेते कि क्या उन्होंने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है।

चेन्नई, 12 अगस्त (आईएएनएस)। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के व्हिप ने मद्रास हाई कोर्ट में दलील दी कि स्पीकर को एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे तब तक स्वीकार नहीं करने चाहिए थे, जब तक वे यह जांच न कर लेते कि क्या उन्होंने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है।

एआईएडीएमके के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति और अन्य लोगों ने स्पीकर के उस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की थीं, जिसमें दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्यवाही लंबित रहने के बावजूद एआईएडीएमके विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए थे। इन याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुलमुर्गन की बेंच के सामने अंतिम सुनवाई हुई।

एआईएडीएमके के व्हिप एग्री कृष्णमूर्ति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गिरी ने कहा कि 13 मई को हुए विश्वास मत के दौरान, पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए सत्ताधारी सरकार के पक्ष में वोट करने वाले छह विधायकों ने अपने विधायक पद से इस्तीफा देने के 30 मिनट के भीतर ही टीवीके को जॉइन कर लिया। इसलिए, स्पीकर को यह पता लगाने के लिए जांच करनी चाहिए थी कि क्या उन्होंने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है।

उन्होंने बताया कि विधानसभा सचिव द्वारा दायर जवाबी हलफनामे में यह नहीं बताया गया था कि क्या स्पीकर ने ऐसी कोई जांच की थी।

यह तर्क दिया गया कि स्पीकर को पता होगा कि इस्तीफा देने वाले विधायक टीवीके में शामिल होने जा रहे थे और इसलिए उन्हें जांच करनी चाहिए थी। वकील ने कहा कि स्पीकर को ऐसी जांच के बिना उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं करने चाहिए थे।

इस मामले में नोटिस जारी होने के बावजूद, स्पीकर इसका विरोध करने के लिए पेश नहीं हुए थे। विधानसभा सचिव के जवाबी हलफनामे में कहा गया था कि स्पीकर की ओर से जवाब दाखिल किया गया है। एग्री कृष्णमूर्ति के वकील ने तर्क दिया कि गवर्नर के विपरीत, स्पीकर को कोई कानूनी छूट नहीं मिलती है। इसलिए, विधानसभा सचिव द्वारा दाखिल जवाब को स्पीकर की ओर से दाखिल जवाब नहीं माना जाना चाहिए।

वकील ने आगे कहा कि चूंकि इस मामले में दायर याचिका में स्पीकर पर आरोप लगाए गए थे, इसलिए स्पीकर को खुद ही उनका जवाब देना चाहिए था।

चूंकि एग्री कृष्णमूर्ति की ओर से दलीलें अभी पूरी नहीं हुई थीं, इसलिए जजों ने सुनवाई 17 अगस्त तक के लिए टाल दी।

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Created On :   12 Aug 2026 8:02 PM IST

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