Delhi News: छोटे शहरों में रियल्टी की नई दिशा, बेहतर क्वालिटी, प्लानिंग और कम्युनिटी लिविंग बनी खरीदारों की प्राथमिकता

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। भारत के रियल एस्टेट बाजार में विकास का अगला दौर अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। बेहतर बुनियादी सुविधाओं, अच्छी कनेक्टिविटी, बढ़ती आय और बदलती जीवनशैली के कारण दूसरे और तीसरे दर्जे के शहर रियल एस्टेट कंपनियों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बाजार बनते जा रहे हैं। इन शहरों में घरों की मांग अब केवल सस्ते घरों तक सीमित नहीं है। खरीदार घर खरीदते समय बेहतर स्थान, निर्माण की गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाओं, आसपास की जरूरी सुविधाओं और भविष्य में बेहतर कनेक्टिविटी को भी महत्व दे रहे हैं।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के अनुसार, 10 प्रमुख दूसरे दर्जे के शहरों में घरों की मांग वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2026 के बीच हर साल औसतन 14 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। नागपुर, लखनऊ और कोयंबटूर में यह वृद्धि करीब 20 प्रतिशत रही। इसी अवधि में आवास ऋण के वितरण में भी 15 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई। इसमें इंदौर, नागपुर और जयपुर जैसे शहर आगे रहे। इससे पता चलता है कि छोटे शहरों में घरों की बढ़ती मांग अब केवल कुछ समय के लिए आया बदलाव नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास और शहरों के तेजी से विस्तार से जुड़ी हुई है।
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कोलियर्स के उभरते शहरों के आकलन में नागपुर, जयपुर और लखनऊ को प्रमुख उभरते बाजारों में शामिल किया गया था। वहीं, उसकी ‘इंडिया रियल एस्टेट 2047’ रिपोर्ट के अनुसार कई दूसरे और तीसरे दर्जे के शहर आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट के अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी देख सकते हैं। कोयंबटूर, इंदौर, कोच्चि और भुवनेश्वर जैसे शहरों के कारोबार और वाणिज्यिक गतिविधियों के बड़े केंद्र के रूप में उभरने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। इस बदलाव में बुनियादी ढांचा सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है। एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डे, राजमार्ग, मेट्रो और औद्योगिक गलियारों जैसी परियोजनाओं ने कई छोटे शहरों के बाहरी इलाकों को नए आवासीय क्षेत्रों में बदलना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ने और नए व्यावसायिक क्षेत्रों के विकसित होने से भी घरों की मांग को मजबूती मिल रही है।
मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी के अनुसार, “दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में रियल एस्टेट की मांग तेजी से बदल रही है। आज का घर खरीदार केवल कीमत और सस्ता विकल्प नहीं देखता, बल्कि बेहतर जीवनशैली, अच्छी तरह विकसित आवासीय परिसर, आधुनिक सुविधाओं और भविष्य में मिलने वाले लाभ को भी महत्व देता है। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ इन शहरों में घरों के अलावा खुदरा और मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाओं की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। आने वाले वर्षों में बेहतर योजना और मजबूत तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने वाले विकासकर्ता इन बाजारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।”
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इसी तरह, न्यूमैक्स सिटी के एमडी सुनील गोयल के अनुसार, “छोटे शहरों में रियल एस्टेट का विकास अब सिर्फ घरों की बढ़ती मांग तक सीमित नहीं है। बेहतर सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं, अच्छी कनेक्टिविटी और बढ़ती आय के कारण इन शहरों में घर खरीदने वालों की जरूरतें भी बदल रही हैं। अब लोग केवल सस्ता घर नहीं, बल्कि अच्छी जगह, बेहतर निर्माण, जरूरी सुविधाओं और परिवार के लिए अच्छी जीवनशैली वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में डेवलपर्स के लिए स्थानीय जरूरत और मांग को समझकर सही कीमत, बेहतर सुविधाओं और अच्छी योजना के साथ प्रोजेक्ट तैयार करना जरूरी होगा।”
दूसरे और तीसरे दर्जे के रियल एस्टेट बाजारों की एक खास बात यह है कि यहां मांग बढ़ने के कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। लखनऊ, जयपुर और इंदौर जैसे शहरों में बेहतर बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसरों का विस्तार अहम भूमिका निभा रहा है। वहीं, वृंदावन, अयोध्या और उज्जैन जैसे शहरों में धार्मिक पर्यटन, होटल और आतिथ्य क्षेत्र, स्वास्थ्य एवं कल्याण सेवाओं और दूसरे घरों की मांग नए अवसर पैदा कर रही है। कोलियर्स ने भी दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में होटल, औद्योगिक, भंडारण और आवासीय क्षेत्रों में निवेश की बढ़ती संभावनाओं की ओर इशारा किया है।
प्रेक्षा सिंह, सीईओ, अग्रशील इन्फ्रा के अनुसार, “दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में विकास का अगला दौर एक साथ कई सुविधाओं वाले शहरों और आवासीय क्षेत्रों के विकास की ओर बढ़ सकता है। घर खरीदार अब केवल ऐसी आवासीय परियोजनाएं नहीं चाहते जो बाकी सुविधाओं से अलग हों। वे ऐसे इलाकों को पसंद कर रहे हैं, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, मनोरंजन और रोजमर्रा की जरूरी सुविधाएं आसपास ही मिल जाएं। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ इन शहरों में लंबे समय तक घरों की मांग मजबूत रहने की संभावना है। हालांकि, विकासकर्ताओं को केवल अनुमान के आधार पर तेजी से विस्तार करने के बजाय स्थानीय मांग, परियोजना को समय पर पूरा करने और टिकाऊ विकास पर ध्यान देना होगा।”
सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का कहना है कि छोटे शहरों में रियल एस्टेट की मांग तेजी से बदल रही है। खरीदार अब केवल किफायती घर नहीं, बल्कि बेहतर क्वालिटी, अच्छी प्लानिंग, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर कम्युनिटी लिविंग चाहते हैं। बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इन शहरों में रियल एस्टेट के लिए आने वाले समय में काफी संभावनाएं हैं।
उद्योग के लिए यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन शहरों में बड़ी और भरोसेमंद रियल एस्टेट कंपनियों की भूमिका बढ़ रही है। अच्छी पारदर्शिता, बेहतर निर्माण गुणवत्ता, समय पर काम पूरा करने और सही प्रबंधन के कारण बड़ी और भरोसेमंद रियल एस्टेट कंपनियों पर घर खरीदारों का भरोसा बढ़ रहा है। हालांकि, इन बाजारों में कुछ चुनौतियां भी हैं। जमीन की बढ़ती कीमतें, निर्माण लागत, सही कीमत तय करना, स्थानीय मांग को समझना और बुनियादी ढांचे के विकास की रफ्तार जैसी बातें आगे भी महत्वपूर्ण रहेंगी। ऐसे में केवल बड़ी जमीन खरीद लेना काफी नहीं होगा। कंपनियों को हर शहर की जरूरत को समझकर परियोजनाएं तैयार करनी होंगी और उन्हें समय पर पूरा करने पर ध्यान देना होगा।
कुल मिलाकर, दूसरे और तीसरे दर्जे के शहर अब भारतीय रियल एस्टेट बाजार के छोटे या गौण बाजार नहीं रह गए हैं। बेहतर बुनियादी ढांचा, बढ़ती आय और बेहतर जीवनशैली की चाह इन शहरों को देश के अगले शहरी विकास दौर का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है। आने वाले वर्षों में आवासीय परियोजनाओं के साथ-साथ कार्यालय, होटल, बाजार और ऐसी परियोजनाओं का भी विस्तार होने की उम्मीद है, जिनमें रहने, काम करने और खरीदारी जैसी कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हों। इससे इन शहरों में रियल एस्टेट का बाजार और बड़ा और विविध होने की संभावना है।
Created On :   8 Sept 2026 9:56 PM IST













