विश्व सफेद छड़ी दिवस सिर्फ एक सहारा नहीं, नेत्रहीन लोगों की सुरक्षा और स्वतंत्रता का भी प्रतीक

विश्व सफेद छड़ी दिवस  सिर्फ एक सहारा नहीं, नेत्रहीन लोगों की सुरक्षा और स्वतंत्रता का भी प्रतीक
हर साल 15 अक्टूबर को विश्व सफेद छड़ी दिवस मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर नेत्रहीन और दृष्टिबाधित लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि दृष्टिबाधित व्यक्ति भी आत्मनिर्भर होकर अपना जीवन जी सकते हैं। उन्हें भी समाज में बराबरी का अधिकार, सम्मान और स्वतंत्र रूप से आने-जाने की सुविधा मिलनी चाहिए।

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर (आईएएनएस)। हर साल 15 अक्टूबर को विश्व सफेद छड़ी दिवस मनाया जाता है। यह दिन खासतौर पर नेत्रहीन और दृष्टिबाधित लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि दृष्टिबाधित व्यक्ति भी आत्मनिर्भर होकर अपना जीवन जी सकते हैं। उन्हें भी समाज में बराबरी का अधिकार, सम्मान और स्वतंत्र रूप से आने-जाने की सुविधा मिलनी चाहिए।

इस दिन सफेद छड़ी के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाई जाती है, जो दुनियाभर में दृष्टिबाधित लोगों की पहचान बन चुकी है।

सफेद छड़ी सिर्फ चलने का सहारा नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का भी प्रतीक है। सफेद रंग दूर से आसानी से दिखाई देता है। दिन के उजाले में हो या रात के समय गाड़ियों की हेडलाइट पड़ने पर, यह छड़ी लोगों और वाहन चालकों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। इससे उन्हें पता चल जाता है कि सड़क पर चल रहा व्यक्ति दृष्टिबाधित है और उसे रास्ता पार करने के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत हो सकती है।

सफेद छड़ी के इस्तेमाल को लोकप्रिय बनाने के पीछे एक दिलचस्प इतिहास भी है। साल 1930 में अमेरिका के पियोरिया शहर में लायंस क्लब के अध्यक्ष जॉर्ज ए. बोनहम ने एक दृष्टिबाधित व्यक्ति को काली छड़ी के साथ सड़क पार करते देखा। काली छड़ी दूर से आसानी से नजर नहीं आ रही थी, जिससे दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता था। इसके बाद छड़ी को सफेद रंग से रंगने और उस पर लाल पट्टियां लगाने का सुझाव दिया गया, ताकि वह दूर से दिखाई दे सके। धीरे-धीरे यह तरीका लोकप्रिय हुआ और सफेद छड़ी दृष्टिबाधित लोगों की पहचान बन गई।

दृष्टिबाधित लोग सफेद छड़ी की मदद से अपने आसपास की जगह को समझते हैं। इसे जमीन पर हल्के से आगे-पीछे घुमाकर वे रास्ते में आने वाली बाधाओं, सीढ़ियों, फुटपाथ के किनारों, गड्ढों और दूसरी रुकावटों का पता लगा सकते हैं। छड़ी से मिलने वाले स्पर्श के संकेत और आसपास की आवाजों की मदद से वे रास्ते का अंदाजा लगाते हैं।

सफेद छड़ी के इस्तेमाल की एक प्रमुख तकनीक को हूवर तकनीक कहा जाता है। इसमें छड़ी को शरीर के सामने नियंत्रित तरीके से चलाया जाता है, ताकि आगे की जमीन और संभावित बाधाओं का पता लगाया जा सके। सही प्रशिक्षण से दृष्टिबाधित लोग अधिक आत्मविश्वास के साथ अकेले यात्रा कर सकते हैं।

आमतौर पर सफेद छड़ी के तीन प्रमुख प्रकार बताए जाते हैं। पहला, मोबिलिटी केन, जिसका इस्तेमाल रास्ते की बाधाओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। दूसरा, सपोर्ट केन, जो चलने में शारीरिक सहारे की जरूरत वाले लोगों के लिए होती है। तीसरा, आइडेंटिफिकेशन केन, जिसका उपयोग कम दृष्टि वाले लोग अपनी स्थिति के बारे में दूसरों को संकेत देने के लिए कर सकते हैं।

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Created On :   14 Oct 2026 6:05 PM IST

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