बिहार सियासत: 'रोहिणी आचार्य पर अत्याचार हो रहे हैं', दिलीप जायसवाल ने फिर उठाया मुद्दा, लालू-राबड़ी को दी ये सलाह

डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद रोहिणी आचार्य का लालू परिवार से रिश्ता तोड़ने वाला मुद्दा अब तक शांत नहीं हुआ है। इस बीच बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने इस मामले पर एक बार फिर अपनी राय दी है। उन्होंने शनिवार (13 दिसंबर) को मीडिया से बातचीत में कहा कि रोहिणी आचार्य पर अत्याचार हो रहे हैं। इसके बारे में बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी को सोचने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है यह एक पारिवारिक मसला है इसलिए परिवार को ही इसके बारे में सोचना चाहिए।
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दिलीप याजसवाल ने रखा अपना पक्ष
RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के बयान पर बिहार बीजेपी अध्यक्ष और बिहार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि यह ऐसी बात है जिसके बारे में लालू यादव और राबड़ी देवी यादव को सोचना चाहिए कि उनकी बेटी पर अत्याचार हो रहे हैं। यह उनका पारिवारिक मामला है, और मुझे लगता है कि परिवार के लोगों को खुद ही पारिवारिक मामलों के बारे में सोचना चाहिए।
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रोहिणी ने लालू परिवार से तोड़ा था रिश्ता
आपको बता दें कि, रोहिणी आचार्य ने लालू परिवार से रिश्ता तोड़ दिया था। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में आरजेडी की हार के बाद उन्होंने राजनीति से दूर जाने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान किया था। इसके अलावा रोहिणी ने उनके साथ बदसलूकी का भी गंभीर इल्जाम लगाया था। वहीं, शुक्रवार (12 दिसंबर) को उन्होंने नीतीश सरकार की ओर से लड़कियों को दस हजार या साइकिलें देने वाली स्कीम के नाम पर महिला सशक्तिकरण का मुद्दा उठाया था। रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर लिखा था कि लड़कियों को 10,000 रुपये देना या साइकिलें बांटना, भले ही नेक इरादे से किया गया हो, लेकिन ये भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण में बाधा डालने वाले व्यवस्थागत मुद्दों को हल करने के मद्देनजर अपर्याप्त है। सरकार और समाज का यह प्रथम दायित्व होना चाहिए कि वह बेटियों के समान अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए, खासकर सामाजिक और पारिवारिक उदासीनता के मद्देनजर l
उन्होंने आगे कहा कि बिहार में गहरी जड़ें जमा चुकी पितृसत्तात्मक मानसिकता सामाजिक और राजनीतिक, दोनों क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता पैदा करती है। प्रत्येक बेटी को इस आश्वासन के साथ बड़े होने का अधिकार है कि उसका मायका एक ऐसा सुरक्षित स्थान है ,जहां वह बिना किसी डर, अपराधबोध, शर्म या किसी को कोई स्पष्टीकरण दिए बिना लौट सकती है। इस उपाय को लागू करना केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं है, बल्कि अनगिनत महिलाओं को भविष्य में होने वाले शोषण और उत्पीड़न से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा ।
Created On :   13 Dec 2025 1:10 PM IST













