नहीं भरना होगा फॉर्म 6?: जानिए क्या है फॉर्म-6, जिसे लेकर सोशल मीडिया, सियासत और चुनाव आयोग में हुआ घमासान, हटने के बाद नए वोटर्स के लिए क्या बदलेगा?

जानिए क्या है फॉर्म-6, जिसे लेकर सोशल मीडिया, सियासत और चुनाव आयोग में हुआ घमासान, हटने के बाद नए वोटर्स के लिए क्या बदलेगा?
फॉर्म 6 के घोषणा वाले हिस्से में लिखा गया कि कोई भी गलत बयान देना 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत सजा-योग्य अपराध है, जिसमें एक साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म 6 के साथ मांगे जाने वाले डिक्लेरेशन फॉर्म को चुनाव आयोग ने हटा दिया है। नए वोटर्स के लिए ये बड़ी राहत मानी जा रही है। चुनाव अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक अब डिक्लेरेशन फॉर्म की कोई जरूरत नहीं होगी। हालांकि चुनाव आयोग ने SIR के दौरान या SIR-के-बाद के समय में, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आइए आपको बताते है फॉर्म 6 क्या है?

आपको बता दें डिक्लेरेशन फॉर्म एक अतिरिक्त दस्तावेज था जिसे उन राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में मांगा गया था, जहां 24 जून 2025 के SIR आदेश और उसके बाद के SIR आदेशों के अनुसार SIR किया गया था।

फॉर्म 6 नए वोटर के मतदाता सूची में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन के तौर पर फॉर्म 6 भरवाया जाता है। यह एक तरह का डिक्लेरेशन दस्तावेज होता है, जिसमें व्यक्ति अपने संबंध में जानकारी फिल करता है। चुनाव आयोग की और से शुरु की गई एसआईआर प्रक्रिया में इसमें कुछ बदलाव किए गए, जिन पर चुनाव आयोग के ही दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्ति दर्ज की, इसके बाद पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। विपक्षी दल चुनाव आयोग पर कई तरह के आरोप लगा रहे है। इसके बाद चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को हटा दिया है।

अब आपको बता दें फॉर्म 6 में क्या -क्या है।

फॉर्म-6 के साथ जोड़ा जाना है, आवेदन भरने के लिए दिशा-निर्देश

1. सामान्य निर्देश-

फॉर्म-6

(a) आवेदन उस विधानसभा क्षेत्र (AC)/संसदीय क्षेत्र (PC) के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को संबोधित किया जाएगा जहाँ आवेदक आम तौर पर रहता है। यदि आवेदक को विधानसभा क्षेत्र/संसदीय क्षेत्र का नंबर और नाम नहीं पता है या कोई संदेह है, तो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी मदद कर सकते हैं और विधानसभा क्षेत्र/संसदीय क्षेत्र का नंबर और नाम न लिखने के आधार पर आवेदन को अस्वीकार नहीं किया जाएगा।

(b) आवेदक आवेदन की जानकारी अंग्रेज़ी या राज्य की आधिकारिक भाषा में भर सकता है और यह आवेदन को अस्वीकार करने का आधार नहीं होगा।

(c) शांति स्टेशन पर अपनी पोस्टिंग की जगह पर मतदाता सूची में सामान्य मतदाता के रूप में नामांकन के लिए आवेदन करने वाले सेवा कर्मी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह पहले से ही किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में सेवा मतदाता या सामान्य मतदाता के रूप में नामांकित नहीं है।

(d) फोटो: सफेद बैकग्राउंड वाली हाल की अच्छी क्वालिटी की पासपोर्ट साइज़ की बिना हस्ताक्षर वाली रंगीन फोटो (4.5cm X 3.5cm) दी गई जगह पर चिपकाई जानी चाहिए। आँखें खुली होनी चाहिए और चेहरे के दोनों किनारे स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए।

(e) मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC): नामांकन के बाद EPIC दिए गए डाक पते पर स्पीड पोस्ट के जरिए मुफ्त में और सही पावती के साथ भेजा जाएगा।

2. आइटम (1) (नाम): सही नाम और स्पेलिंग राज्य की आधिकारिक भाषा और अंग्रेजी दोनों में दी जानी चाहिए। यदि केवल एक भाषा में भरा जाता है, तो सिस्टम अपने आप दूसरी भाषा में लिप्यंतरण (transliterate) कर देगा जिससे स्पेलिंग की गलतियाँ हो सकती हैं।

3. आइटम (2a) और (2b) (रिश्तेदार का नाम और उपनाम): विवाहित महिला आवेदक के मामले में, पति का नाम लिखना बेहतर होगा। (कॉलम में लागू न होने वाले विकल्पों को काट दें)।

4. आइटम (5) आधार विवरण: जानकारी के प्रमाणीकरण के उद्देश्य से आधार नंबर दिया जाना चाहिए। अगर आवेदक के पास आधार नंबर नहीं है, तो इसकी जानकारी आइटम 5 (b) वाले बॉक्स में दी जा सकती है।

5. आइटम (6) (लिंग):

(a) 'पुरुष'/'महिला'/'थर्ड जेंडर' के लिए दिए गए सही बॉक्स में साफ़ तौर पर टिक का निशान लगाना चाहिए।

(b) थर्ड जेंडर से जुड़े आवेदक अपना लिंग 'पुरुष' या 'महिला' या 'थर्ड जेंडर' के तौर पर बता सकते हैं।

6. आइटम 7(a)(b) (जन्म तिथि):

(a) उम्र के सबूत के तौर पर फ़ॉर्म में बताए गए डॉक्युमेंट्स में से किसी एक की खुद से अटेस्ट की हुई कॉपी लगाई जा सकती है। फ़ॉर्म में बताए गए डॉक्युमेंट को जमा करने से रजिस्ट्रेशन और सर्विस मिलने में तेज़ी आएगी।

(b) अगर फॉर्म में बताए गए डॉक्युमेंट्स में से कोई भी उपलब्ध नहीं है, तो आवेदक को उम्र के सबूत के तौर पर कोई दूसरा डॉक्युमेंट लगाना चाहिए; और उस डॉक्युमेंट का नाम फ़ॉर्म के 'घोषणा' (DECLARATION) वाले हिस्से के आइटम 7(ii) और आइटम (iv) में बताना चाहिए। ऐसे मामले में, आवेदक को वेरिफिकेशन के लिए इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफ़िसर या उनके द्वारा नियुक्त किसी दूसरे ऑफ़िसर के सामने खुद पेश होना होगा।

7. आइटम 8 (मौजूदा सामान्य निवास):

(a) सामान्य निवास के सबूत के तौर पर आवेदक/माता-पिता/जीवनसाथी के नाम पर बताए गए डॉक्युमेंट्स में से किसी एक की खुद से अटेस्ट की हुई कॉपी के साथ पिन कोड वाला पूरा पोस्टल एड्रेस बताना चाहिए।

(b) शेड/फुटपाथ पर रहने वाले बेघर भारतीय नागरिकों और सामान्य निवास का कोई डॉक्युमेंट्री सबूत न रखने वाले सेक्स वर्कर्स के मामलों में ज़रूरी फ़ील्ड वेरिफिकेशन किया जाएगा, बशर्ते वे एनरोलमेंट के लिए योग्य हों।

(c) जो छात्र एनरोलमेंट के लिए योग्य हैं, वे या तो अपने माता-पिता के पते पर या उस हॉस्टल/मेस में एनरोल हो सकते हैं जहाँ वे आम तौर पर रह रहे हैं।

8. घोषणा (DECLARATION): "घोषणा" वाले हिस्से में सभी जानकारी पूरी तरह से भरी जानी चाहिए। कृपया ध्यान दें कि घोषणा वाले हिस्से में कोई भी गलत बयान देना 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत सजा-योग्य अपराध है, जिसमें एक साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

चुनाव आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म 6 से घोषणा को हटा दिया है, ईसी ने ये कदम जिन राज्यों में एसआईआर हुई है, वहां से हटाया गया है। चुनाव आयोग के इस कदम से फॉर्म 6 में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी।

चुनाव आयुक्तों की आपत्ति

खबरों के मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्ति में कहा कि फॉर्म 6 एक वैधानिक फॉर्म है, जिसे नियमों के तहत तय किया गया है। इसलिए इसमें बदलाव करने के लिए पहले संबंधित नियमों में करेक्शन जरूरी है। ऑनलाइन फॉर्म 6 में जोड़े गए नए हिस्से को अनधिकृत और अवैध बताते हुए उसे हटाने की बात कही थी।

आपको बता दें फॉर्म 6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जा रहा है। लेकिन ईसी ने मंगलवार देर रात ECINET पोर्टल पर ये चेंज किए है। दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस लेकर आपत्ति जताई थी।

जिन राज्यों में एसआईआर हो चुकी है, उन राज्यों में नए वोटर्स को वोट जुड़वाने के लिए उससे यह नहीं पूछा जाएगा, कि उनके माता-पति/ दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर वोटिंग लिस्ट में था या नहीं, ये जरूरी नहीं होगा, जबकि जिन राज्यों में एसआईआर नहीं हुई है, उन राज्यों में यदि एसआईआर हुई और उसके बाद ये घोषणा हटती है, तो ऐसे प्रदेशों में नए वोटर्स को अतिरिक्त जानकारी देने की आवश्यकता नहीं होगी और मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

SIR में पुरानी मतदाता सूची से नए और मौजूदा मतदाताओं की जानकारी मिलाई जाती है। नए मतदाताओं से उनके या परिवार के सदस्यों के नाम पिछली SIR की सूची में होने की जानकारी मांगी गई। प्रारंभ में इसके लिए अलग घोषणा पत्र था। बाद में यही जानकारी ऑनलाइन Form 6 में जोड़ दी गई, लेकिन डाउनलोड होने वाले फॉर्म 6 में यह हिस्सा नहीं था।

Created On :   30 Sept 2026 2:31 PM IST

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