Maulana Arshad Madani On Mohan Bhagwat: मौलाना अरशद मदनी ने मोहन भागवत को दिया जवाब, सांप्रदायिक नफरत फैलाने वालों का JUH करेगी विरोध

मौलाना अरशद मदनी ने मोहन भागवत को दिया जवाब, सांप्रदायिक नफरत फैलाने वालों का JUH करेगी विरोध

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय इस्लामी विद्वान, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष और दारुल उलूम देवबंद के वर्तमान प्रधानाध्यापक मौलाना अरशद मदनी ने आरएसएस (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के चीफ मोहन भागवत के एक बयान का विरोध किया है। जिसमें संघ चीफ ने भारतीय मुस्लिमों की घर वापसी से संबंधित बयान दिया था। 'घर वापसी' का अर्थ अन्य धर्मों से हिंदू धर्म में वापस आना है, जिसे धर्म परिवर्तन कहते हैं। इस पर मौलाना ने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद (JUH) ऐसी सांप्रदायिक और नफ़रत फैलाने वाली सोच का हमेशा से विरोध करती रही है।

मोहन भागवत के बयानों पर मदनी ने जताया विरोध

मदनी ने उनकी बात का कड़ा विरोध जताते हुए एक्स पर एक पोस्ट साझा किया है। उन्होंने कहा, 'जो 70 साल में कहने वाले पैदा नहीं हुए, वो बातें आज कही जा रही हैं कि 20 करोड़ मुस्लिमों की 'घर वापसी' कराई जाएगी। ऐसा लगता है कि मानों उन्होंने ही अपनी मां का दूध पिया है और किसी ने नहीं। लेकिन सच यह है कि जो आवाज देश को तबाही, बर्बादी और आपस में दुश्मनी की तरफ ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती।'

दिनदहाड़े लोगों को मारा जा रहा- मदनी

उन्होंने कहा, देश में नफरत की आग भड़काई जा रही है, हिंसा का माहौल बना हुआ है। दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएं हो रही हैं। गाय के नाम पर बेगुनाह लोगों को मारा जा रहा है और इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है।' उन्होंने कहा, 'ये सब होने के बाद भी कुछ लोग यह ऐलान करते हैं कि देश में वही रहेगा जो उनके विचारों के आधार पर चलेगा। ऐसी सोच रखना संविधान का उल्लंघन है बल्कि यह देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी खतरनाक है।

मौलाना अरशद मदनी ने कहा, 'धर्म के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी धर्म मानवता, प्रेम और एकता का संदेश देते हैं, जो लोग धर्म का इस्तेमाल नफरत और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं वह कभी अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते। कहा कि मुसलमान जिंदा हैं और अपने धर्म पर जिंदा रहेंगे। मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है और कयामत तक जिंदा रहेगा। इस देश में शांति, भाईचारा और आपसी सद्भाव केवल धर्मनिरपेक्ष संविधान की छाया में ही संभव है।'

Created On :   18 Feb 2026 10:42 PM IST

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