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5 राज्यों के नतीजे घोषित, बंगाल में फिर चला ममता बनर्जी का जादू, टीएमसी को मिला पूर्ण बहुमत

5 राज्यों के नतीजे घोषित, बंगाल में फिर चला ममता बनर्जी का जादू, टीएमसी को मिला पूर्ण बहुमत

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनाव नतीजे रविवार को घोषित किए गए। 5 राज्यों में सबसे ज्यादा नजरें बंगाल पर टिकी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बार तृणमूल कांग्रेस की सीधी टक्कर भाजपा से थी। इससे पहले के चुनावों में तृणमूल की सीधी टक्कर कांग्रेस और लेफ्ट से होती थी। 

इन चुनावों में टीएमसी ने जीत की हैट्रिक लगाई। बंगाल में एक बार फिर ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली बीजेपी को हराकर दिखा दिया की बंगाल में अभी भी उन्हीं का डंका बजता है। तीसरी बार की यह जीत न सिर्फ राज्य में बनर्जी की स्थिति को और मजबूत करेगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने में भी मदद करेगी।

नंदीग्राम से हारी ममता
बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट से ममता बनर्जी के सामने उनके पूर्व सहयोगी और भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी मैदान में थे। सुवेंदु अधिकारी ने 1957 वोटों से ममता बनर्जी को हरा दिया। नंदीग्राम से ममता बनर्जी चुनाव हार गईं। ममता बनर्जी ने अपनी हार स्वीकार कर ली। लेकिन साथ ही आरोप लगा कि पहले उन्हें जीता हुआ घोषित किया गया और बाद में दबाव में आकर चुनाव आयोग ने फैसला पलट दिया। बंगाल में टीएमसी की जीत के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि नंदीग्राम के बारे में चिंता मत करो। नंदीग्राम के लोग जो भी जनादेश देंगे, मैं उसे स्वीकार करती हूं। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन मैं न्यायालय जाऊंगी क्योंकि मुझे जानकारी है कि परिणामों की घोषणा के बाद कुछ हेरफेर की गई और मैं उसका खुलासा करूंगी।

ममता ने लोगों को समर्पित की जीत
तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी को तैयार है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की जनता को यह जीत समर्पित की है। बनर्जी ने कहा कि यह बंगाल के लोगों की जीत है। यह देश के लोगों की जीत है। यह लोकतंत्र की जीत है। बंगाल के लोगों ने लोकतंत्र को बचाया है। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी। ममता ने कहा कि मैं घोषणा करती हूं कि राज्य के सभी लोगों को मुफ्त टीका मिलेगा। 

ममता बनर्जी ने कहा, मैं केंद्र सरकार से यह भी अनुरोध करना चाहूंगी कि वह देश के सभी लोगों के लिए मुफ्त टीकाकरण की व्यवस्था करें। यह हमारी मांग है और अगर यह पूरी नहीं होती है, तो मैं इसे करूंगी। उन्होंने कहा कि भाजपा ने धन-बल, बाहुबल और ताकत का इस्तेमाल किया, लेकिन बंगाल की जनता ने विकास के लिए वोट दिया है। बंगाल के लोगों ने लोकतंत्र को बचाया है। मैं अपनी सभी माताओं, बहन और अल्पसंख्यक भाइयों और बहनों को बधाई देती हूं। बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि कोविड की स्थिति के कारण अभी कोई विजय जुलूस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह भी मामूली तरीके से ही आयोजित किया जाएगा।

5 राज्यों के क्या रहे नतीजे?

1. बंगाल

कुल सीटें: 294 (वोटिंग 292 सीटों पर हुई)
बहुमत: 148 (292 सीटों के लिहाज से 147)
रिजल्ट: तृणमूल+ (214)
           भाजपा+ (76)
           कांग्रेस+ (1)
           अन्य (1)
पिछली बार कौन जीता: तृणमूल कांग्रेस
नोट: 2016 में GJM भाजपा के साथ था और उसने 3 सीटें जीती थीं। इस तरह NDA को 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2 सीटों पर चुनाव टल गए हैं। इसलिए 292 सीटों पर बहुमत का आंकड़ा 147 है। बची हुई 2 सीटों पर वोटिंग के बाद बहुमत का आंकड़ा 148 हो जाएगा।

2. असम

कुल सीटें: 126
बहुमत: 64
रिजल्ट: भाजपा+ (76)
           कांग्रेस+ (49)
           अन्य (1)
पिछली बार कौन जीता: भाजपा+
नोट: 2016 में भाजपा गठबंधन को 86 सीटें मिली थीं। 12 सीट जीतने वाली बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट इस बार भाजपा की जगह कांग्रेस के साथ है। वहीं, 2016 में जनता दल के साथ लड़ी AIUDF भी कांग्रेस के साथ है।

3. तमिलनाडु

कुल सीटें: 234
बहुमत: 118
पिछली बार कौन जीता: अन्नाद्रमुक
नोट: 2016 में भाजपा और अन्नाद्रमुक अलग-अलग चुनाव लड़े थे।

4. केरल

कुल सीटें: 140
बहुमत: 71
रिजल्ट: माकपा+ (93)
           कांग्रेस+ (41)
           भाजपा+ (0)
           अन्य (6)
पिछली बार कौन जीता: LDF

5. पुडुचेरी

कुल सीटें: 30
बहुमत: 16
रिजल्ट: कांग्रेस+ (8)
           AINRC+ (16)
           अन्य (6)
पिछली बार कौन जीता: कांग्रेस+द्रमुक
नोट: 2016 में भाजपा, अन्नाद्रमुक और AINRC ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।