यूपी विधानसभा चुनाव 2027: नॉर्थ में ओवैसी की AIMIM के बढ़ते कदम ने अखिलेश यादव को चिंता में डाला

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में 2027 में विधानसभा चुनाव होने है, लेकिन उसकी तैयारियां राजनीतिक दलों ने अभी से शुरु कर दी है। सभी पार्टियां अपनी अपनी रणनीति बना रही है। बिहार विधानसभा चुनाव में ओवैसी की एआईएमआईएम को मिलती सफलता यूपी में राह देख रही है। बिहार में एआईएमआईएम के पांच विधायक है।
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यूपी से कई ऐसी खबरें सामने आ रही है कि चुनावों को लेकर मुस्लिम मतदाता और नेता अभी से अपनी जमीन और ऐसी पार्टी चुनने की तलाश में है, जो उन्हें सरंक्षण प्रदान कर सके। अभी तक के चुनावों में कांग्रेस और सपा की ओर जाता मुस्लिम वोटर्स बीएसपी की राह देख रहा है। इसके पीछे की वजह अब तक सपा और कांग्रेस का करते आए समर्थन माना जा रहा है। अब यह वर्ग नई राह पकड़ रहा है। दूसरी तरफ एआईएमआईएम के नॉर्थ में बढ़ते वर्चस्व ने सपा और कांग्रेस को सकते में ला दिया है।
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सपा चीफ अखिलेश यादव भी मुस्लिमों को लेकर टेंशन में है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में मायावती ने कई मुस्लिम चेहरों को विधानसभा चुनाव में उतारा था। लेकिन सफलता नहीं मिली, जबकि दर्जनभर से अधिक सीटों पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं का संख्या 44 फीसदी के करीब है, बीजेपी के बुलडोजर एक्शन से परेशान मुस्लिम वर्ग बीएसपी में अपने आपको सुरक्षित महसूस देख रहा है। यहीं चिंता सपा को सता रही हैं। हालही में कई मुस्लिम संगठनों के बीच बैठकों से ये बात सामने आई। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में मुस्लिम वर्ग सत्ता के पॉवर सेंटर से दूर होता चला जा रहा है।
कुछ दिन पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था ,मुसलमानों की कोई पॉलिटिकल एजेंसी नहीं है। अगर आप सिर्फ वोटर बनकर रहेंगे, तो घर पर बुलडोज़र चलेगा सभी पार्टियां आपको डराकर आपका वोट हासिल करना चाहती हैं, मजलिस आपको कह रही है कि अपनी पॉलिटिकल एजेंसी बनाइए, ओवैसी ने अपनी अवाम से अपील करते हुए कहा अगर हम सिर्फ वोटर बनकर रहेंगे तो ज़ुल्म कभी खत्म नहीं होगा। ओवैसी मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन से अलग अलग राज्यों में अपनी पार्टी AIMIM का प्रचार-प्रसार और फैलाव कर रहे है। उनका मानना है कि अब तक को मुस्लिम मतदाता अन्य दलों को जाता रहा वो अब मुस्लिम की पार्टी AIMIM को मिले, यानि वो मुस्लिमों के प्रमुख हिमायती बनकर चुनाव में लाभ लेना चाहते है। हालांकि ओवैसी मुस्लिमों के नेतृत्व की बात कर रहे है। जबकि सत्तारूढ़ बीजेपी चुनाव दर चुनाव मुस्लिम उम्मीदवार ना उतारकर राजनीति में उनकी शून्यता करना चाहती है।
भले ही योगी 2 सरकार में एक मुस्लिम को राज्यमंत्री बनाकर बीजेपी ने अपने ऊपर लगे उस धब्बे को धुंधला कर दिया,कि मुसलमान उससे दूर हैं, और वो मुसलमानों से दूर। कई बीजेपी नेताओं का कहना होता है, मुसलमान उन्हें वोट नहीं करता,इसी के चलते बीजेपी ने विधानसभा और लोकसभा चुनाव में एक भी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया।
उत्तर भारत की राजनीति में ओवैसी के नेतृत्व में एआईएमआईएम के बढ़ते प्रभुत्व ने सपा और कांग्रेस को तो संकट में डाल ही दिया है, खुद मुस्लिम समुदाय भी कनफ्यूज है कि किसके साथ जाया जाए, औवेसी के साथ जाने से सत्ता तो नहीं मिल सकती। ऐसे में मुस्लिम वर्ग में वोट बंटने की भी चिंता बनी हुई है।
Created On :   24 Jan 2026 4:19 PM IST














