Parliament Winter Session: 'जरूरी मुद्दों को छोड़कर वंदे मातरम पर हो रही चर्चा' राज्यसभा में चर्चा से पहले विपक्ष सरकार पर हमलावर

जरूरी मुद्दों को छोड़कर वंदे मातरम पर हो रही चर्चा राज्यसभा में चर्चा से पहले विपक्ष सरकार पर हमलावर
देश में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् को लेकर सियासत गरमाई हुई है। सोमवार को लोकसभा में 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में जमकर एक दूसरे पर जमकर जुबानी हमले हुए। लोकसभा में चर्चा के बाद अब मंगलवार को राज्यसभा में भी इस पर विशेष चर्चा होगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् को लेकर सियासत गरमाई हुई है। सोमवार को लोकसभा में 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई। इस दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में जमकर एक दूसरे पर जमकर जुबानी हमले हुए। लोकसभा में चर्चा के बाद अब मंगलवार को राज्यसभा में भी इस पर विशेष चर्चा होगी।

इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सत्तापक्ष पर लगातार हमलावर है। इसी क्रम में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा और लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश में और भी जरूरी मुद्दे हैं जिन्हें छोड़कर वंदे मातरम पर चर्चा हो रही है।

'बंगाल चुनाव को देखते हुए हो रही चर्चा'

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि देश में इतने सारे जरूरी मुद्दे हैं। विपक्ष को सत्र दर सत्र इन अहम मुद्दों को उठाने नहीं दिया जाता। फिर भी, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन्होंने वंदे मातरम पर चर्चा की। वे बार-बार वंदे मातरम, वंदे मातरम का मुद्दा उठाते रहे। यह असल में दो छंदों का राष्ट्रीय गीत था। आनंदमठ उपन्‍यास में बंकिम चंद्र चटर्जी ने इसमें चार छंद जोड़े, लेकिन भाजपा इसके ऐतिहासिक संदर्भ को तोड़-मरोड़कर इसे धार्मिक नजरिए से देखना चाहती है, जबकि ऐसा कुछ नहीं हुआ था।

'सरकार को इतिहास की जानकारी नहीं'

वहीं, पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहा कि इन्हें तो इतिहास की भी जानकारी नहीं है। रवींद्रनाथ टैगोर के पत्र का हवाला दिया गया है। टैगोर ने नेहरू को एक पत्र लिखा था, जिसमें देश की गरिमा और सम्मान पर चर्चा की गई थी। उन्होंने इस बारे में बात की थी कि किस चीज से नफरत नहीं फैलेगी और भारत की असली संस्कृति क्या है, सनातन धर्म। यह कुछ ऐसा है जिस पर हम सभी को सोचने की जरूरत है। टैगोर ने यह बात कही थी, लेकिन उन्हें इसकी कोई समझ नहीं है। भाजपा ने तो स्वातंत्रता संग्राम में भाग तक नहीं लिया था।

Created On :   8 Dec 2025 11:09 PM IST

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