I-PAC जांच में हस्तक्षेप का मामला: पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी से जुडी ईडी याचिका पर आज सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट

पश्चिम बंगाल CM ममता बनर्जी से जुडी ईडी याचिका पर आज सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट
I-PAC के सह-संस्थापक विनेश कुमार चंदेल को 13 अप्रैल को अरेस्ट किया गया था। पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। फिलहाल वह 23 अप्रैल तक हिरासत में रहेंगे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ी ईडी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। इस याचिका में I-PAC पर पड़े ईडी रेड में ममता पर हस्तक्षेप करने का आरोप है। जांच एजेंसी ईडी और टीएमसी सरकार के बीच जारी कानूनी विवाद का हिस्सा बन गया है। पिछली सुनवाई में टॉप कोर्ठ ने जांच में ममता की दखल को बेहद असामान्य और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया था। टीएमसी ने ईडी की रेड को विधानसभा चुनाव प्रभावित करने के मकसद से राजनीतिक उद्देश्य से की गई।

इस केस की शुरुआत 8 जनवरी को हुई थी, ईडी ने कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग केस में I-PAC के ठिकानों पर रेड मारी थी। इस दौरान ममता बनर्जी 100 से अधिक पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ I-PAC ऑफिस तथा इसके संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं। इसे लेकर ईडी ने ममता बनर्जी पर जांच में दखल देने का आरोप लगाया है, साथ ही टीएमसी चीफ लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनावी डेटा से जुड़े दस्तावेज वहां से हटवा दिए। इससे एजेंसी की जांच प्रभावित हुई और काम में बाधा आई। इससे पहले की सुनवाई में सर्वोच्च अदालत ने चिंता जताते हुए कहा यदि कोई वरिष्ठ संवैधानिक पदाधिकारी ईडी जांच में बाधा डालता है, तो ऐसी स्थिति में कानूनी उपाय क्या होंगे।

I-PAC के सह-संस्थापक विनेश कुमार चंदेल को 13 अप्रैल को अरेस्ट किया गया था। पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया। जो 23 अप्रैल तक हिरासत में रहेंगे।

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केस की सीबीआई से जांच कराने, सीएम और राज्य के पुलिस महानिदेशक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जबकि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया है। प्रदेश सरकार का तर्क है कि ईडी एक सरकारी विभाग है, इसलिए वह मौलिक अधिकारों का दावा करते हुए सीधे अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय नहीं जा सकती।

Created On :   22 April 2026 11:19 AM IST

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