लड्डू विवाद: तिरुपति मंदिर में बिना जांच के खरीदा गया 70 लाख किलोग्राम घी, आंध्र प्रदेश सरकार के एक सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

तिरुपति मंदिर में बिना जांच के खरीदा गया 70 लाख किलोग्राम घी, आंध्र प्रदेश सरकार के एक सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने ने सेवानिवृत्त आईएएस की अध्यक्षता में बनाया था जांच आयोग

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तिरुपति मंदिर का लड्डू विवाद फिर शुरु हो गया है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम ने 70 लाख किलोग्राम से ज्यादा घी बिना अनिवार्य गुणवत्ता जांच के खरीदा, इसका खुलासा आंध्र प्रदेश सरकार के एक सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट में हुआ है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में TTD बोर्ड, खरीद समिति के सदस्यों और अधिकारियों को इस पूरी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

बीते दिन आई आयोग की रिपोर्ट में बताया कि टीटीडी ने बिना जांच के ही घी खरीद लिया, जिसका इस्तेमाल प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू बनाने में किया गया। सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष जांच दल की रिपोर्ट पर सीएम एन चंद्रबाबू नायडू ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार की अध्यक्षता में यह जांच आयोग गठित किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि टेंडर रूल्स को सही तरीके से लागू नहीं किया गया और जानबूझकर सुरक्षा मानक धीरे-धीरे कमजोर किए गए। कुछ अहम लैब रिपोर्ट को दबा दिया गया,जिनमें मिलावट की पुष्टि थी, उन्हें और खरीद के फैसले बिना सही निगरानी के लिए गए। अगस्त 2022 में हुई लैब टेस्ट में यह पाया गया कि घी में वनस्पति तेल की मिलावट है, लेकिन रिपोर्ट को दबा दिया गया। और संबंधित कंपनियों को ब्लैक लिस्ट नहीं किया गया। कुछ कंपनियों को FSSAI टेस्ट से छूट दी गई, जिससे बड़े स्तर पर बिना जांच के घी की खरीद हुई। सप्लायर ने बोली की प्रक्रिया में बहुत कम कीमतें देकर अनुबंध हासिल किए। कुछ मामलों में अयोग कंपनियों को भी ठेके दिए गए, जबकि उनकी उत्पादन क्षमता सही नहीं थी।

भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी जैसी कुछ कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने मिलावटी घी की आपूर्ति जारी रखी और सिंथेटिक केमिकल का इस्तेमाल किया। प्रीमियर एग्री फूड्स जैसी प्रमुख आपूर्तिकर्ता कंपनियों को भी मिलावट के बावजूद ऑर्डर मिलते रहे। कंपनी एआर डेयरी फूड ने उत्पादन के गलत आंकड़े दिए, लेकिन फिर भी आपूर्ति कर्ता बनी रही।

आयोग की रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रशासन की बड़ी विफलता थी, जिसकी वजह से सप्लायर को मिलावटी घी देने का अवसर मिला। सरकारी अधिकारियों ने सुरक्षा जांच को नजरअंदाज किया और लैब की रिपोर्ट को दबा दिया, जिनमें वनस्पति वसा (वेजिटेबल फैट) की मौजूदगी पाई गई थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि टीटीडी के अधिकारियों ने पहले FSSAI के बीटा-सिटोस्टेरोल टेस्ट को अनिवार्य करने की योजना बनाई थी, जिसे 1 जुलाई 2022 से लागू होना था, लेकिन बाद में इसे बदल दिया गया और सप्लायर को रियायत दी गई। जिसके चलते 70 लाख किलो से अधिक घी बिना अनिवार्य जांच के खरीदा गया। आयोग ने इस पूरी प्रकिया में प्रशासनिक की बड़ी विफलता और चूक माना।

टीटीडी लैब में आधुनिक जांच उपकरण नहीं थे और इनका अपग्रेड 3 साल तक टलता रहा। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि स्वतंत्र निगरानी को कमजोर करने वाले लोग ही जांच और निरीक्षण समितियों में शामिल किए गए थे, सुरक्षा प्रणाली की नजरअंदाज किया गया, नियमों की अनदेखी की गई। जांच में पाया गया कि निविदा समिति के सदस्यों ने बिना पूरी मंजूरी के नियमों में ढील दी और कम कीमत वाली बोलियों को बिना जांच के असेप्ट किया गया। 2019 में तय किए गए पात्रता नियमों को भी कुछ महीनों में कमजोर कर दिया गया, जिससे कुछ ऐसी कंपनियां भी आपूर्तिकर्तां में शामिल हो गईं, जिनके पास अनिवार्य प्रोडक्शन कैपेसिटी का अभाव था।

Created On :   3 May 2026 10:44 AM IST

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