टीवीएस उत्तराधिकार विवाद: केवल बाद के वैल्यूएशन बदलाव फैमिली सेटलमेंट दोबारा खोलने का आधार नहीं - इनगवर्न

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। प्रॉक्सी एडवाइजरी फर्म इनगवर्न रिसर्च ने टीवीएस परिवार में चल रहे उत्तराधिकार विवाद पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केवल व्यावसायिक प्रदर्शन और मूल्यांकन में बदलाव को किसी दस्तावेजी पारिवारिक व्यवस्था में परिवर्तन का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
इनगवर्न के अनुसार, संबंधित संदर्भ तिथि के बाद व्यवसायों के सापेक्ष प्रदर्शन या मूल्यांकन में आए बदलाव अपने आप में व्यवस्था में परिवर्तन का आधार नहीं होने चाहिए। फर्म ने कहा, 'यह सिद्धांत परिवार-नियंत्रित समूहों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। व्यवसायों में चक्रीय और क्रियान्वयन से जुड़े उतार-चढ़ाव स्वाभाविक रूप से आते हैं। जहां पक्षों के बीच इस बात पर विवाद हो कि पूर्ण समझौता हुआ था या नहीं, वहां उचित मार्ग यही है कि इस प्रश्न का निर्धारण दस्तावेजी व्यवस्था, मूल करारों और लागू कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाए।'
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यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब 11 अक्टूबर को टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन ने कहा था कि उनकी निजी संपत्तियों और पारिवारिक व्यवसायों को अलग करने का काम खुले और पारदर्शी तरीके से किया गया है। इसके अगले दिन मल्लिका श्रीनिवासन और लक्ष्मी वेणु ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि परिवार किसी आर्थिक समझौते पर नहीं पहुंचा है। इन दोनों बयानों से इस विषय पर मतभेद सार्वजनिक हो गया कि परिवार के चार सदस्यों द्वारा मार्च 2024 में हस्ताक्षरित और टीवीएस होल्डिंग्स द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित एमओयू पूर्ण समझौता था या नहीं।
वेणु श्रीनिवासन का कहना रहा है कि उनके पुत्र सुदर्शन वेणु और पुत्री लक्ष्मी वेणु के बीच संपत्तियों का आवंटन 10 दिसंबर 2020 के संदर्भ में उचित और न्यायसंगत था। यह तारीख टीवीएस समूह के व्यापक समझौते की है। दूसरी ओर, मल्लिका श्रीनिवासन और लक्ष्मी वेणु का कहना है कि परस्पर सहमति से कोई आर्थिक समझौता नहीं हुआ है और मार्च 2024 के एमओयू को परिवार के आर्थिक हितों के समझौते के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
इनगवर्न ने उल्लेख किया कि टीवीएस होल्डिंग्स ने मार्च 2024 में स्टॉक एक्सचेंजों को एमओयू की जानकारी दी थी और कहा था कि इसका कंपनी के कारोबार या निरंतरता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि फाइलिंग में करार की विस्तृत शर्तों का खुलासा नहीं किया गया था और न ही इससे यह स्थापित हुआ था कि पूर्ण आर्थिक समझौता संपन्न हो चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, माइनॉरिटी शेयरधारकों की चिंता पारिवारिक संपत्ति के निजी बंटवारे से अधिक इस बात से जुड़ी है कि उत्तराधिकार व्यवस्थाएं प्रमोटर नियंत्रण, प्रबंधन की निरंतरता और सूचीबद्ध कंपनी के मूल्य की सुरक्षा को लेकर स्पष्टता प्रदान करती हैं या नहीं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बदलाव की प्रक्रिया के कुछ तत्व औपचारिक कॉरपोरेट प्रक्रियाओं के माध्यम से आगे बढ़े हैं। इनमें वीएस ट्रस्ट संरचना, बेनिफिशियल ओनरशिप से जुड़े खुलासे और नेतृत्व स्तर की नियुक्तियां शामिल हैं।
इनगवर्न ने कहा, 'पारिवारिक मतभेदों का समाधान दस्तावेजी व्यवस्थाओं, ट्रस्ट संरचनाओं, संविदात्मक उपायों और आवश्यकता होने पर कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से करना ही सर्वोत्तम है। सार्वजनिक रूप से विवाद बढ़ाने से सूचीबद्ध कंपनी के हितधारकों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है।'
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