MP Public Trust Campaign: MP में अब हर शुक्रवार अफसरों की होगी ‘फील्ड क्लास’, गांव-शहर पहुंचकर सुनेंगे जनता की बात, जानिए मोहन सरकार का जन-विश्वास अभियान क्या है

MP में अब हर शुक्रवार अफसरों की होगी ‘फील्ड क्लास’, गांव-शहर पहुंचकर सुनेंगे जनता की बात, जानिए मोहन सरकार का जन-विश्वास अभियान क्या है
सरकारी दफ्तर में शिकायत लेकर गए और जवाब मिला- ‘देखते हैं’, ‘फाइल चल रही है’ या ‘अभी समय लगेगा’। ऐसी स्थिति से लोगों को राहत दिलाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनता के बीच ले जाने की पहल की है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकारी दफ्तर में शिकायत लेकर गए और जवाब मिला- ‘देखते हैं’, ‘फाइल चल रही है’ या ‘अभी समय लगेगा’। ऐसी स्थिति से लोगों को राहत दिलाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने प्रशासन को जनता के बीच ले जाने की पहल की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत हर शुक्रवार अधिकारी फील्ड में उतरेंगे, गांव और शहरों में लोगों से सीधे बात करेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। खास फोकस उन मामलों पर रहेगा, जो सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी के तहत लंबे समय से अटके हैं।

अब सिर्फ दफ्तर में बैठकर नहीं चलेगा काम

सरकार की इस पहल का सबसे खास हिस्सा है- हर शुक्रवार फील्ड विजिट। यानी अधिकारी सिर्फ अपने ऑफिस में बैठकर फाइलों और रिपोर्टों की समीक्षा नहीं करेंगे, बल्कि जमीन पर जाकर लोगों से मिलेंगे।

गांव हो या शहर, प्रशासनिक अमला लोगों के बीच पहुंचेगा। वहां स्थानीय समस्याओं को समझने के साथ यह भी देखा जाएगा कि सरकारी योजनाओं और सेवाओं का फायदा लोगों को वास्तव में मिल रहा है या नहीं।

सीधे शब्दों में कहें तो सरकार चाहती है कि जनता को अपनी छोटी-बड़ी समस्या के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।

पुरानी शिकायतों की भी खुलेगी फाइल

इस अभियान में नई शिकायतें सुनने के साथ-साथ लंबित मामलों के निपटारे पर भी जोर रहेगा। सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी से जुड़े मामलों की समीक्षा की जाएगी।

खासकर राजस्व से जुड़े मामलों को तेजी से निपटाने की कोशिश होगी। जमीन, नामांतरण, सीमांकन जैसे मामलों में लोगों को अक्सर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ऐसे मामलों को प्राथमिकता से देखने का मकसद यही है कि लोगों को समय पर राहत मिल सके।

जनता और सरकार के बीच की दूरी घटाने की कोशिश

सरकार की इस पहल के पीछे एक सीधा विचार है- शासन तभी अच्छा माना जाएगा, जब जनता को उसका असर जमीन पर दिखाई दे।

अधिकारी जब सीधे लोगों के बीच जाएंगे तो उन्हें स्थानीय समस्याओं को समझने में आसानी होगी। साथ ही, किस स्तर पर काम अटका है और उसकी वजह क्या है, इसका भी पता लगाया जा सकेगा।

इससे प्रशासन की जवाबदेही तय करने में भी मदद मिलेगी। यानी शिकायत सिर्फ दर्ज करके मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि उसके समाधान की स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी।

सुशासन के लिए संस्थाओं के साथ भी काम

मोहन सरकार सुशासन को मजबूत करने के लिए सिर्फ फील्ड विजिट पर निर्भर नहीं है। प्रशासन और सार्वजनिक नीतियों को बेहतर बनाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर भी काम किया जा रहा है।

इन संस्थाओं की मदद से नीतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है। मकसद ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें सरकारी फैसले ज्यादा पारदर्शी हों और उनका फायदा लोगों तक समय पर पहुंचे।

निवेशकों के लिए भी आसान होगी प्रशासनिक प्रक्रिया

सुशासन का दायरा सिर्फ आम लोगों की शिकायतों तक सीमित नहीं है। सरकार निवेश और औद्योगिक विकास के लिए भी पारदर्शी नीतियों और समयबद्ध प्रशासनिक प्रक्रिया पर जोर दे रही है।

निवेशकों को मंजूरी और दूसरी प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कम परेशानी हो, इसके लिए व्यवस्था को आसान और जवाबदेह बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मानना है कि बेहतर प्रशासन से आम जनता के साथ-साथ उद्योग और निवेश को भी फायदा मिलेगा।

मकसद साफ- जनता को दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ें

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान को आसान भाषा में समझें तो सरकार का प्रयास है कि अफसर जनता के पास जाएं, जनता को हर छोटी समस्या के लिए अफसरों के पास न जाना पड़े।

हर शुक्रवार होने वाली फील्ड विजिट, लंबित शिकायतों के निपटारे और सीधे संवाद के जरिए प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू होती है, तो इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जो सरकारी काम के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

Created On :   8 Aug 2026 5:45 PM IST

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