MP News: बढ़ते वन अपराधों के बाद अब मप्र के वन बल को भी मिला आर्म्स चलाने का अधिकार

बढ़ते वन अपराधों के बाद अब मप्र के वन बल को भी मिला आर्म्स चलाने का अधिकार
मप्र के वन अमले काे अब पहली बार बंदूक चलाने पर होने वाली जनहानि के लिये कानूनी संरक्षण मिल गया है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मप्र के वन अमले काे अब पहली बार बंदूक चलाने पर होने वाली जनहानि के लिये कानूनी संरक्षण मिल गया है। ऐसा महाराष्ट्र एवं उड़ीसा राज्य में पहले से ही संरक्षण मिला हुआ है। मप्र सरकार ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर यह अधिकार सभी वनरक्षकों, वनपालों, उप वन क्षेत्रपालों, वन क्षेत्रपालों, सहायक वन संरक्षकों, उप वनमण्डल अधिकारियों, उप वन संरक्षकों, उप संचालकों, वनमण्डल अधिकारियों, क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों, क्षेत्र संचालकों और राज्य के अन्य ऐसे सभी वन अधिकारियों को दिए है, जिन्हें वन एवं वन्यजीव संरक्षण, संवर्धन व प्रबंधन से संबंधित लोक व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व सौंपा गया है। इसके लिये मप्र गृह विभाग ने भी सहमति दे दी। मप्र में ऐसा संरक्षण सिर्फ पुलिस को मिला हुआ था। अब वन अमला भी आत्मरक्षार्थ सर्विस आर्म्स का उपयोग कर सकेगा।

वन बल को यह अधिकार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 की उपधारा (2) के तहत दिया गया है जिसमें आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान की गई किसी भी कार्रवाई के लिए कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। नाेटिफिकेशन के अनुसार, मैदान में तैनात सभी वन अधिकारियों द्वारा जब भी आग्नेयास्त्र (आर्म्स) का प्रयोग किया जाएगा, तो ऐसी घटना की जांच संबंधित क्षेत्र के कार्यपालिक दण्डाधिकारी द्वारा की जाएगी और पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही, जिसमें किसी भी प्रकृति का आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया जाना और/या गिरफ्तारी किया जाना सम्मिलित है, तभी प्रारंभ की जाएगी, जब न्यायिक जांच के परिणामस्वरूप यह निष्कर्ष प्राप्त हो कि आग्नेयास्त्र का प्रयोग अनावश्यक, अनुचित तथा आधिक्य में था तथा ऐसे न्यायिक जांच प्रतिवेदन को राज्य शासन द्वारा स्वीकार कर लिया गया हो।

प्रदेश में बढ़ रहे वन अपराध

नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वन-आधारित संसाधनों के साथ-साथ राज्य के संरक्षित एवं आरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के संरक्षण, सुरक्षा एवं अस्तित्व पर निरंतर बढ़ते खतरों को देखते हुए राज्य के वन कार्मिकों को आग्नेयास्त्रों से सुसज्जित किए जाने का निर्णय लिया गया है। वन कार्मिको द्वारा अपने निर्धारित कर्तव्यों एवं जिम्मेदारियों के पालन में आग्नेयास्त्रों का प्रयोग करने के कारण उनके विरुद्ध अनावश्यक अथवा दुर्भावनापूर्ण आपराधिक कार्यवाहियां प्रारंभ किए जाने की संभावना रहती है और उन्हें पूर्व स्वीकृति के बिना अभियोजन से संरक्षण प्रदान किया जाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसा करने के निर्देश जारी किये हुये हैं।

लटेरी कांड के बाद वन अमले ने की थी मांग

बहुचर्चित लटेरी कांड के बाद और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मप्र शासन ने यह निर्णय लिया है। दरअसल, वन अमले पर हो रहे हमले, रेत खनन, खनन माफियाओं के बढ़ते दबदबे और वन अमले के पास हथियार होते हुए चलाने का अिधकार नहीं होने के कारण कई बार वन अमले द्वारा आत्मरक्षार्थ हथियारों के उपयोग के अिधकारों की मांग की जा रही थी। वन अमले ने पूर्व में गृह व वन मंत्री रहे हिम्मत कोठारी के कार्यकाल में वन विभाग ने हथियार खरीदे थे, लेकिन उपयोग नहीं हो पाए। इसमें गृह विभाग ने भी कई आपत्तियां पूर्व में ली थी कि पुलिस के समानांतर वन अमले को हथियार चलाने का अिधकार-संरक्षण नहीं दिया जा सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद मप्र शासन ने इस पर अमल किया है।

Created On :   8 Aug 2026 8:11 PM IST

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