MP News: वीआईटी को लेकर एनएचआरसी सख्त, सरकार और यूजीसी से मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट

डिजिटल डेस्क, भोपाल। वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) भोपाल के नाम और उसके वास्तविक भौगोलिक स्थान को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्य शासन और यूजीसी से एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने कहा कि 30 मार्च 2026 और 5 जून 2026 को निर्देश जारी किए जाने के बावजूद यूजीसी ने जवाब नही दिया। आयोग ने राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव और यूजीसी से चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट 29 नवंबर तक देने के लिए कहा है। इससे पहले गुरुवार को आयोग ने दिए गए दस्तावेजों और राज्य सरकार की रिपोर्ट पर विचार किया। आयोग ने उल्लेख किया कि वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय की सरकार की दी रिपोर्ट में दूरी के सवाल का जवाब नहीं दिया गया।
विश्वविद्यालय के स्थान को लेकर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के मन में स्थान को लेकर गलत धारणा बनती है। आयोग ने यह भी सवाल उठाया कि विश्वविद्यालय अपने प्रॉस्पेक्टस, आधिकारिक वेबसाइट और विज्ञापनों में अपनी लोकेशन का उल्लेख किस प्रकार करता है। इस पहलू की जांच किए बिना केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि विश्वविद्यालय का नाम कानून के तहत निर्धारित किया गया है। आपको बता दें कांग्रेस के युवा संगठन एनएसयूआई के उपाध्यक्ष रवि परमार ने शिकायत में आरोप लगाया था कि वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय अपने नाम में भोपाल शब्द का इस्तेमाल कर रहा। जबकि शिकायत में उल्लेख है कि यूनिवर्सिटी भोपाल से लगभग 100 किमी दूर सीहोर में स्थित है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के नाम और वास्तविक स्थान के बीच लगभग 100 किमी दूरी होने के कारण प्रवेश लेने वाले छात्रों को परेशान होना पड़ता है। यह विवि सीहोर जिले में है, जबकि विवि के रिकॉर्ड में इसे भोपाल दर्शाया कर छात्रों को ठगा जा रहा।
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अवैध क्लीनिक और अशांति के आरोपों की जांच पर भी सवाल
एनएसयूआई की शिकायत में विश्वविद्यालय परिसर में कथित अनधिकृत क्लिनिक के संचालन और पूर्व में परिसर में अशांति की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया गया था। आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा कि राज्य सरकार की रिपोर्ट में इन आरोपों की जांच किए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। इससे शिकायत के महत्वपूर्ण पहलू पर अभी भी जवाब नहीं आया है। आयोग के निर्देशों के अनुसार, अब राज्य सरकार को अतिरिक्त रिपोर्ट में इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
राजपत्र की तारीख में अंतर पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा
सरकार के दिए दस्तावेजों में आयोग ने विसंगति का भी उल्लेख किया। विभागीय पत्र में 24 अगस्त 2017 की राजपत्र अधिसूचना का उल्लेख किया गया था, जबकि संलग्न दस्तावेज 13 जून 2017 का मप्र असाधारण राजपत्र था। जिसमें वर्ष 2007 के अधिनियम की अनुसूची में संशोधन से संबंधित विवरण शामिल है। आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह दोनों दस्तावेजों के बीच संबंध स्पष्ट करे। यह भी बताए कि 24 अगस्त 2017 की अधिसूचना में क्या उल्लेख है।
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एनएसयूआई की मांग
एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने मांग की है कि विश्वविद्यालय के नाम और वास्तविक लोकेशन के संबंध में विद्यार्थियों और अभिभावकों को स्पष्ट, सटीक और भ्रामकता से मुक्त जानकारी दें। विश्वविद्यालय के प्रॉस्पेक्टस, वेबसाइट और विज्ञापनों की निष्पक्ष जांच की जाए। शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं पर जिम्मेदारी तय की जाए। उच्च शिक्षा में प्रवेश विद्यार्थियों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में विश्वविद्यालयों के नाम, परिसर के वास्तविक स्थान, उपलब्ध सुविधाओं और प्रवेश संबंधी जानकारी में पारदर्शिता अनिवार्य होनी चाहिए।
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