ACR और DE होगी समाप्त: 10 हजार से अधिक कार्यवाहक प्रभार वाले पुलिसकर्मियों को नहीं मिला प्रमोशन, अब सितंबर में मिलेगा अवसर

10 हजार से अधिक कार्यवाहक प्रभार वाले पुलिसकर्मियों को नहीं मिला प्रमोशन, अब सितंबर में मिलेगा अवसर
मध्य प्रदेश पुलिस महकमें में कार्यवाहक वाले 10 हजार से अिधक पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को अब सितंबर में रेगुलर प्रमोशन मिल सकता है।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस महकमें में कार्यवाहक वाले 10 हजार से अधिक पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को अब सितंबर में रेगुलर प्रमोशन मिल सकता है। सितंबर में जिन पुलिसकर्मियों की एन्यूअल सर्विस रिकॉर्ड (एसीआर) और विभागीय जांच लंबि होने से जिन्हें वर्तमान में रेगुलर प्रमोशन का लाभ नहीं मिल पाया, लेकिन वे शासन के आदेशों के वे उच्च पदों पर पदस्थ है, उन्हें सितंबर में होने वाली दूसरी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में प्रमोशन का मौका मिलेगा। बशर्तें उनकी डीई और एसीआर सही होगी।

पुलिस अधिकारियों के 10 साल से प्रमोशन रूके हुए थे, इसी बीच उन्हें समयमान-वेतनमान तो मिल गया था, लेकिन प्रमोशन नहीं मिला था। ऐसे में वेतन-भत्ते तो उच्च स्केल स्तर के मिलने लगे थे, लेकिन प्रमोशन नहीं था। इसके चलते वर्ष 2021 में पुलिस मुख्यालय ने सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर और डीएसपी तक के पुलिस कर्मचारियों को कार्यवाहक प्रभार देना शुरू कर दिया था। इस कार्यवाहक पदोन्नति प्रणाली से तत्कालीन सरकार के समय (तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के कार्यकाल में) पुलिस कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति (एक्टिंग प्रमोशन) की व्यवस्था शुरू हो गई। इसके तहत वरिष्ठता और वेतन का दावा किए बिना अधिकारियों को उच्च पदों पर पदस्थ कर दिया गया। हालांकि समयमान-वेतनमान बढ़ चुका था।

विसंगति दूर करने निकाला आदेश

ऐसे में कार्यवाहक पदोन्नति और वास्तविक पदोन्नति के बीच एक विसंगति खड़ी हो गई, जिसे दूर करने के लिए 13 जुलाई, 2026 को पुलिस मुख्यालय ने एक आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि जो अधिकारी/कर्मचारी पदोन्नत नहीं हो पाए हैं वह सुचारू रूप से कार्यवाहक पद पर अपनी सेवाए देते रहेंगे। दरअसल, यह आदेश में मुख्य रूप से उन कार्यवाहक पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों के पदों को सुरक्षित रखने के लिए निकाला गया है जो नियमित पदोन्नति प्रक्रिया के कारण पदावनत (डिमोट) होने की कगार पर थे।

वर्तमान सरकार द्वारा वास्तविक और नियमित पदोन्नति (रेगुलर प्रमोशन) दिया जा रहा है। ऐसे में यह संकट खड़ा हो गया था कि जो कर्मचारी पहले से ही कार्यवाहक के रूप में उच्च पदों पर थे, वे नियमित पदोन्नति न मिल पाने की स्थिति में वापस अपने मूल (निचले) पदों (डिमोशन) पर भेज दिए जाते। इनके डिमोशन को रोकने के लिए पुलिस मुख्यालय ने 13 जुलाई, 2026 को जारी आदेश में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का हवाला दिया और स्पष्ट किया कि नियमित पदोन्नति के बाद भी जो कार्यवाहक कर्मचारी पदोन्नत नहीं हो पाते हैं, वे आगामी आदेश तक अपने कार्यवाहक पद पर पूर्ववत काम करते रहेंगे।

सरकार ने उठाया सुरक्षात्मक कदम

  • इस आदेश से कर्मचारियों के हित और सरकार की छवि पर पड़ने वाले नुकसान से बचाव हो गया। इस आदेश का सीधा फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा जो किसी तकनीकी कारण या वरिष्ठता सूची के फेरबदल से पदावनत हो सकते थे। इससे उनका कार्यस्थल पर मनोबल और सामाजिक सम्मान बना रहेगा। साथ ही सरकार के प्रति नकारात्मक छवि नहीं बनेगी।
  • नियमित पदोन्नति शुरू करने से पहले राज्य शासन ने अपने पक्ष में यह आदेश जारी कर सुरक्षात्मक कदम उठाया। इसके पीछे राजनीतिक दृष्टकोण से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनकी सरकार को कर्मचारी हितैषी और संवेदनशील साबित करना है।
  • शासकीय कर्मचारी और पुलिस बल किसी भी राज्य में एक बड़ा और प्रभावशाली वर्ग होते हैं। यदि नियमित पदोन्नति के चक्र में सैकड़ों कर्मचारी डिमोट होते, तो सरकार के खिलाफ भारी असंतोष पनप सकता था, जिसे राज्य शासन ने इस आदेश के तहत खत्म कर दिया।
  • राजनीतिक विश्लेषकों और आलोचकों के नजरिए से, इस कदम को सीधे तौर पर सरकारी कर्मचारी वर्ग और उनके परिवारों के वोट बैंक को साधने के रूप में देखा जा रहा है। वास्तविक पदोन्नति का लाभ देने के साथ-साथ किसी का नुकसान न होने देना, चुनावी और राजनीतिक रूप से सरकार के पक्ष में माहौल तैयार करना है।

मुख्यमंत्री की इमेज बिल्डिंग पर काम

मप्र सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 30 जून 2026 को जारी पत्र और पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा 8 जुलाई 2026 को जारी मप्र लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 के तहत पदोन्नति प्रक्रिया शुरु की गई। यह पदोन्नति प्रक्रिया शुरु करने के पहले कई बार मंथन और परामर्श किया गया। इसके बाद प्रमोशन के निर्देश दिये गये। पुलिस महकमें में चर्चा है कि जो काम पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री नहीं कर पाए, वह काम वर्तमान मुख्यमंत्री कर रहे ताकि कर्मचारी वर्ग में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की छवि कर्मचारी के पक्ष में बनाई जा सके।

इनका कहना

विभाग में कई कार्यवाहक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की पदोन्नति हुई है। कुछ कार्यवाहक कर्मचारियों की डीआई, एसीआर और मामलों की जांच के चलते नहीं हुआ है। उनकी फाइल बंद लिफाफे में है। जांच कंपलीट होने के बाद पदोन्नत की प्रक्रिया की जाएगी। सितम्बर दूसरी डीपीसी में रुके हुए कार्यवाहक पुलिसकर्मियों को कंसीडर किया जाएगा। नियम अनुसार पदोन्नत किया जाएगा।

Created On :   21 July 2026 12:34 AM IST

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