रहस्य - डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुराने विशाल इमली के पेड़ में रहस्यमयी आग

रहस्य - डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुराने विशाल इमली के पेड़ में रहस्यमयी आग

Bhaskar Hindi
Update: 2020-01-20 08:51 GMT
रहस्य - डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुराने विशाल इमली के पेड़ में रहस्यमयी आग

डिजिटल डेस्क जबलपुर । ग्वारीघाट रोड स्थित सिद्ध गणेश मंदिर के पास एक विशाल पेड़ में लगी आग शनिवार की रात से क्षेत्र में कौतूहल का विषय बनी हुई है। 150 साल से ज्यादा पुराने इस इमली के पेड़ के तनों से शनिवार रात धुआँ निकलना शुरू हुआ, बीच-बीच में आग की लपटें निकलने पर लोगों ने इसकी सूचना दमकल विभाग को दी। रात में पहुँचे दमकल वाहनों ने सुबह तक मशक्कत की, लेकिन धुआँ निकलना बंद नहीं हुआ। लोग इसको लेकर तरह-तरह के कयास लगाने लगे। कई ट्रिप पानी डाले जाने के बाद भी जब लपटों और धुआँ पर काबू नहीं पाया जा सका, तो पेड़ काटने का निर्णय लिया गया। विशाल पेड़ को काटकर ठूँठ बनाने के बाद भी उसमें से देर रात तक धुआँ और रुक-रुककर आग की लपटें निकलती रहीं। 
 क्षेत्रीय नागरिक प्रमोद तिवारी तथा सिद्ध गणेश मंदिर के पुजारी पं. रामानुज तिवारी ने बताया कि हरे-भरे इस विशाल पेड़ में शनिवार रात करीब 12 बजे कई जगह से धुआँ निकलते देखा गया, इसी बीच रुक-रुककर आग की लपटें निकलने लगीं। लोगों ने इसे रहस्यमयी तथा भू-गर्भ से जुड़ी किसी घटना से जोड़ते हुए तरह-तरह के कयास लगाने शुरू कर दिए। इसकी सूचना दमकल विभाग को दी गई। मौके पर पहुँचे दमकल वाहन ने दो ट्रिप पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। नागरिकों का कहना है कि इससे लपटें निकलनी तो बंद हो गईं, लेकिन कई तनों से धुआँ निकलना अनवरत जारी रहा। 
सुबह फिर निकलने लगीं लपटें
रात में पानी डालकर वापस लौटे दमकल वाहन को सुबह फिर लपटें निकलने की सूचना पर वहाँ पहुँचाया गया। दमकल कर्मियों ने रात की तरह ही एक बार फिर पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन कई ट्रिप पानी डालने के बाद भी जब कोई फर्क नहीं पड़ा, तो पेड़ काटने का निर्णय लिया गया। विशाल पेड़ को काटने में काफी समय लगा, जब वह ठूँठ रह गया, तब भी उसमें से धुआँ और लपटें निकलती रहीं। इस ठूँठ में ही दमकल वाहन से दो ट्रिप पानी डाला गया, लेकिन कुछ देर थमने के बाद फिर पुरानी स्थिति बन जाती। 
पूरा पेड़ काटना होगा
दमकल विभाग के कर्मियों का कहना है कि यह विशाल पेड़ अंदर से खोखला है। संभवत: इसी खाली हिस्से में आग लगी है, जो कि धीरे-धीरे सुलग रही है। पानी डालने से वह कुछ देर के लिए थम जाती है, लेकिन उसकी गर्मी से लकड़ी फिर से सुलग उठती है। दमकल कर्मियों ने इसे किसी भू-गर्भीय हलचल की संभावना से जोडऩे से इनकार किया है। उनका कहना है कि पेड़ के बचे हिस्से को भी काटने के बाद यह आग बुझ जाएगी और लोगों की आशंकाओं-कुशंकाओं का भी निराकरण हो जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि पेड़ को पूरी तरह से काटने की कार्यवाही सोमवार को की जाएगी। पी-5
कोई गैस रिसाव की भी चर्चा
इस घटना को देख प्रत्यक्षदर्शियों में तरह-तरह की चर्चाएँ होने लगीं। कोई इसे भू-गर्भ से किसी गैस रिसाव से जोड़ रहा था, तो कोई जमीन में ज्वालामुखी होने जैसी बात की आशंका जता रहा था। कुछ क्षेत्रीय नागरिकों ने निगम अमले से भू-गर्भ विशेषज्ञ को बुलाने की भी बात की। बहरहाल प्राचीन पेड़ को काटे जाने के बाद भी उससे धुआँ निकलना बंद नहीं हुआ। 
 

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