श्रीलंका : राष्ट्रपति सिरिसेना के संसद भंग करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

श्रीलंका : राष्ट्रपति सिरिसेना के संसद भंग करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Bhaskar Hindi
Update: 2018-11-13 14:28 GMT
हाईलाइट
  • अदालत ने चुनाव की तैयारियों पर भी रोक लगा दी है।
  • चीफ जस्टिस नलिन परेरा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया है।
  • राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना के संसद भंग करने के फैसले को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया।

डिजिटल डेस्क, कोलंबो। श्रीलंका में इन दिनों राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के संसद भंग करने के फैसले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। इतना ही नहीं अदालत ने चुनाव की तैयारियों पर भी रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस नलिन परेरा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। जजों ने कमांडोज की घेरेबंदी के बीच यह अहम निर्णय दिया। अपदस्थ प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे ने इसे जनता की पहली जीत बताया है। विक्रमसिंघे ने ही सिरिसेना के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

बता दें कि राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने 225 सदस्यीय संसद को भंग कर दिया था। संसद भंग होने के बाद श्रीलंका में तयशुदा कार्यक्रम से दो साल पहले 5 जनवरी को चुनाव की घोषणा की गई थी। इसके लिए 19 नवंबर से 26 नवंबर के बीच नामांकन किए जाने थे। दरअसल, श्रीलंका में नाटकीय घटनाक्रम के बाद पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। राजपक्षे के शपथ ग्रहण समारोह में प्रेसिडेंट मैत्रिपाला सिरिसेना और कई अन्य विपक्षी नेता मौजूद रहे थे। श्रीलंका की राजनीति में अचानक इस तरह का बदलाव इसलिए आया था क्योंकि सिरिसेना की पार्टी यूनाइटेड पीपल्स फ्रीडम (UPFA) ने पूर्व प्रधानमंत्री रणिल विक्रमेसिंघे की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (UNP) के साथ गठबंधन तोड़ लिया था।

विक्रमेसिंघे सरकार का गठन 2015 में हुआ था जब सिरिसेना के समर्थन के साथ वह प्रधानमंत्री बने थे। विक्रमेसिंघे के पीएम बनते ही महिंद्र राजपक्षे का लगभग एक दशक से चला आ रहा शासन समाप्त हुआ था।

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