श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में 80 प्रतिशत मतदान

श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में 80 प्रतिशत मतदान

Bhaskar Hindi
Update: 2019-11-16 03:49 GMT
श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में 80 प्रतिशत मतदान

डिजिटल डेस्क, कोलंबो।श्रीलंका में शनिवार को आठवें राष्ट्रपति चुनाव के लिए 80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। देश अभी भी लगभग तीन दशक लंबे गृहयुद्ध और सात महीने पहले ईस्टर के दिन यहां हुए आतंकी हमले के घावों से उबर रहा है। संडे टाइम्स के अनुसार, मतदान होने के बाद मतपेटियों को मतगणना केंद्रों तक पहुंचाया गया। कुल 12,845 मतदान केंद्रों में सुबह सात बजे से मतदान शुरू हुआ।

सत्तारूढ़ न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएफ) गठबंधन के साजित प्रेमदासा (52) और श्रीलंका पोडुजना पेरमुना (एसएलपीपी) के गोटाभाया राजपक्षे (70) के बीच मुख्य मुकाबला है। इसके अलावा 35 उम्मीदवार भी अपना भाग्य इस मतदान में अजमा रहे हैं। 1982 के बाद ऐसा पहली बार है, जब राष्ट्रपति चुनाव में सबसे अधिक दावेदार मैदान में हैं। 2015 में केवल 18 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।

गोटाभाया राजपक्षे एक सेवानिवृत्त सैनिक हैं, जिन्होंने उस दौरान श्रीलंका के रक्षा विभाग की कमान संभाली थी, जब उनके बड़े भाई महिंदा राजपक्षे राष्ट्रपति (2005-2015) थे। इसके अलावा जब श्रीलंका ने 2009 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ अपना युद्ध समाप्त किया तब भी वह रक्षा विभाग के प्रमुख रहे। हांलाकि, महिंदा राजपक्षे की वर्ष 2015 की हार के बाद इस परिवार का राजनीतिक भविष्य लुप्त होता दिखाई दे रहा था, लेकिन इस साल 21 अप्रैल को ईस्टर के रोज हुए हमलों के बाद से गोटाभाया की स्थति काफी मजबूत हुई है। इन हमलों में 269 लोग मारे गए थे।

चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने खुद को सिंहली बौद्ध बहुमत के राष्ट्रवादी और चैंपियन के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि अप्रैल के हमलों के मद्देनजर मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा का वादा भी किया। दूसरी ओर लिट्टे द्वारा मई 1993 में मारे गए 1989 में राष्ट्रपति बने रणसिंघे प्रेमदासा के पुत्र साजित प्रेमदासा ने मुस्लिम और तमिल अल्पसंख्यकों के लिए लड़ने का संकल्प लिया है।

चुनाव मैदान में 35 उम्मीदवार हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला केवल सत्तारूढ़ न्यू डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएफ) गठबंधन के साजित प्रेमदासा (52) और श्रीलंका पोडुजना पेरमुना (एसएलपीपी) के गोताबेया राजपक्षे (70) राष्ट्रपति पद के बीच है। गोताबेया एक सेवानिवृत्त सैनिक हैं, जिन्होंने उस दौरान श्रीलंका के रक्षा विभाग का कार्यभार संभाला था, जब उनके बड़े भाई, महिंद्रा राजपक्षे राष्ट्रपति (2005-2015) थे और जब श्रीलंका ने 2009 में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) के साथ अपना युद्ध समाप्त किया था।

उन्होंने अप्रैल में ईस्टर के दिन हुए हमलों के मद्देनजर मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा का वादा करते हुए, राष्ट्रवादी और सिंहली बौद्ध बहुमत के चैंपियन के रूप में राष्ट्रपति अभियान के दौरान खुद को पेश किया है। वहीं दूसरी ओर, साजित प्रेमदासा, राणासिंघे प्रेमदासा के पुत्र हैं, जिन्होंने 1989 से मई 1993 में कोलंबो में लिट्टे द्वारा आत्मघाती बम विस्फोट में मारे जाने तक राष्ट्रपति के रूप में सेवा दी। उन्होंने मुस्लिम और तमिल अल्पसंख्यकों के लिए लड़ने का संकल्प लिया है।

अल्पसंख्यक तमिलों और मुसलमानों के वोटों ने भी जनवरी 2015 में राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना के चुनाव में प्रमुख भूमिका निभाई थी। अन्य मुख्य उम्मीदवार मार्क्‍सवादी पार्टी जनमत विमुक्ति पेरमुना (जेवीपी) के नेता अनुरा कुमारा डिसानायके हैं, जिनके कारण 1971 और 1987-1988 में युवा विद्रोह हुए। चौथे लोकप्रिय दावेदार सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल महेश सेनानायके हैं,जिन्होंने पिछले अगस्त में सेना छोड़ने के बाद नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी) का गठन किया। अगर प्रेमदासा चुनाव जीतते हैं, तो वर्तमान कैबिनेट और सरकार अगले आम चुनाव तक जारी रहेगी और अगर गोताबेया राजपक्षे जीत हासिल कर लेते हैं और संसद में 113 के आंकड़ों वाले बहुमत को साबित करते हैं, तो सरकार बदलने की संभावना है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा है कि चुनाव परिणाम शनिवार रात तक आने की उम्मीद है।

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