अमित शाह ने कहा- नागरिकता संसोधन एक्ट वापस लेने का सवाल ही नहीं

अमित शाह ने कहा- नागरिकता संसोधन एक्ट वापस लेने का सवाल ही नहीं

Bhaskar Hindi
Update: 2019-12-17 15:14 GMT

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) का देश के कई राज्यों में हिंसक विरोध देखने को मिल रहा है। इस विरोध के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने दो-टूक कह दिया है कि बीजेपी और मोदी सरकार इस कानून को लेकर अडिग है। अल्पसंख्यक शरणार्थियों को सरकार नागरिकता जरूर देगी। विपक्ष को जो राजनीतिक विरोध करना है वो करें।

CAA वापस नहीं लिया जाएगा
अमित शाह ने न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "नागरिकता संशोधन एक्ट जरा भी वापस नहीं होगा, किंचित मात्रा में संभावना नहीं है।" उन्होंने विश्वविद्यालयों में चल रहें प्रदर्शन को लेकर कहा कि "देश में 400 से ज्यादा विश्वविद्यालय है, उनमें से 5 में प्रोटेस्ट हो रहा है जिनमे जामिया मिलिया, JNU, लखनऊ और AMU शामिल है। शाह ने कहा, "मैं स्टूडेंट से अपील करता हूं कि आप सभी नागरिक संशोधन एक्ट का अच्छी तरह से स्टडी करें। अगर लगता है कि वो किसी के भी खिलाफ है तो जरूर सरकार के साथ चर्चा करनी चाहिए, हम तैयार हैं।"

विपक्षी दल फैला रहें दुष्प्रचार
नागरिकता कानून को लेकर देश के कई राज्यों में चल रहे विरोध को लेकर शाह ने कहा, "जो रिएक्शन आ रहे हैं उसके दो कारण हैं। कुछ राजनीतिक पार्टियां हिंदू-मुस्लिम के बीच में इससे भेद बनाना चाहती हैं। दूसरा कारण इनके अपप्रचार से भ्रांति खड़ी हुई है।" शाह ने कहा, "मैं इतना पूछना चाहता हूं कि आप पथराव करोगे, आग लगाओगे तो पुलिस एक्शन नहीं लेगी तो क्या करेगी? मैं अभी भी कह रहा हूं कि इसका मेन कारण एक अपप्रचार है जो कांग्रेस और कुछ राजनीतिक दलों ने चलाया है।"

नागरिकता देने की प्रोसेस अनंत नहीं
शाह ने इस बात को भी साफ किया कि नागरिकता देने की प्रोसेस एंडलेस नहीं है। उन्होंने कहा, "दो दिन तक एक बहुत बड़ी अफवाह चली कि यह प्रक्रिया अनंत है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह प्रक्रिया अनंत नहीं है। 31 दिसंबर 2014 तक जो शरणार्थी आएं हैं उन्हें ही नागरिकता दी जाएगी।" शाह ने कहा "ये स्पष्टीकरण होते ही पूर्वोत्तर में धीरे धीरे शांति हो रही है, तीन दिन से वहां कोई हिंसा नहीं हुई है।"

किसी की नागरिकता वापस नहीं ली जाएगी
शाह ने कहा, "नागरिकता संशोधन बिल में कहीं पर भी किसी की नागरिकाता वापस लेने का प्रावधान है ही नहीं, इसमें नागरिकता देने का प्रावधान है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होकर यहां पर आए छह अल्पसंख्यक समुदायों को नागरिकता मिलेगी। शाह ने कहा, जो इस देश का नागरिक है, उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, इस देश के एक भी मुसलमान के साथ अन्याय नहीं होगा, मैं इसका विश्वास दिलाता हूं।"

नागरिकता देना हमारा दायित्व
शाह ने कहा, "हम मानते हैं कि ये जो लाखों करोड़ों लोग जो अपना धर्म बचाने के लिए देश कि शरण में आये हैं, नेहरू-लियाकत पैक्ट के अनुसार इस देश का दायित्व है हम उन्हें नागरिकता दें।" उन्होंने कहा कि "ये नौबत ही न आती, अगर कांग्रेस पार्टी के उस समय के नेता धर्म के आधार पर देश का विभाजन न होने देते।" 

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