दैनिक भास्कर हिंदी: बदल रही है खूबसूरती की परिभाषा, गोरा रंग खूबसूरती का पैमाना नहीं- यामी गौतम

October 31st, 2019

डिजिटल डेस्क, मुम्बई। कई सालों से एक मशहूर फेयरनेस क्रीम ब्रांड के साथ काफी सालों से जुड़ीं बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम कहना है कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वक्त के साथ-साथ खूबसूरती की परिभाषा बदल गई है। अब गोरा रंग खूबसूरती का मापदंड नहीं रहा है। यामी की आगामी फिल्म बाला भी खूबसूरती को संबोधित करती है। फिल्म वक्त से पहले गंजे हुए एक युवक और एक सांवली रंग की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म के इन दोनों किरदारों को आयुष्मान खुराना और भूमि पेडनेकर ने निभाया है।

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि यामी एक मशहूर फेयरनेस क्रीम का चेहरा है जो रंगवाद को बढ़ावा देती है। भारत में सांवली या गाढ़े रंग की महिलाओं को जिस तरह से निरंतर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है, इसे वह किस तरह से देखती हैं? क्या एक सेलेब्रिटी के तौर पर उन्होंने इस पर कोई स्टैंड लिया है?

यामी ने इसके जवाब में कहा कि सोशल मीडिया और फिल्में उन्हीं चीजों को उजागर करती है जो सदियों से हमारे चारों ओर विद्यमान है। उस वक्त इन एड फिल्मों को बनाने की वजह भी यह थी। उस वक्त खूबसूरती की परिभाषा यह थी कि एक अच्छा दूल्हा और एक अच्छी नौकरी के लिए एक लड़की का गोरा होना जरूरी है। मुझे खुशी है कि वक्त बदल गया है और खूबसूरती की परिभाषा पर बातचीत शुरू हो गई है।

अमर कौशिक द्वारा निर्देशित और दिनेश विजान द्वारा निर्मित बाला न केवल राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता आयुष्मान खुराना के लिए बल्कि एक असामान्य विषय के कारण भी चर्चा में है। यामी को यकीन है कि फिल्म इस बड़े विषय पर बदलाव लाने जा रही है।

यामी ने कहा कि फिल्म एक महत्वपूर्ण माध्यम है और बाला हमें उस महत्वपूर्ण विषय पर बात करने देती है जो सिर्फ समय से पहले गंजेपन, गहरी रंगत या इस तरह की चीजों तक सीमित नहीं है, जो किसी इंसान के आत्मविश्वास को प्रभावित करती है। यह फिल्म कहती है कि एक इंसान जैसा है उसे उसी रूप में खुश होना चाहिए। इसका तात्पर्य आत्म-स्वीकृति और आत्म-प्रेम से है। यामी की फिल्म बाला 7 नवंबर को रिलीज हो रही है।

--आईएएनएस

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