महंगाई का आतंक: सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंची, इन चीजों के महंगे होने से आम लोगों की जेब पर बढ़ सकता है बोझ

सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंची, इन चीजों के महंगे होने से आम लोगों की जेब पर बढ़ सकता है बोझ
अगस्त महीने में महंगाई दर 4.82% दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों को देखें तो महीनेभर में ही महंगाई 0.72% बढ़ गई है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में महंगाई को लेकर आम लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत पर पहुंचने की खबर से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है। खुदरा महंगाई का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। जब खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, दूध, ईंधन और दूसरी जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं, तो परिवारों को पहले के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ता है। बता दें कि, इससे पहले अगस्त महीने में महंगाई दर 4.82% दर्ज की गई थी। इन आंकड़ों को देखें तो महीनेभर में ही महंगाई 0.72% बढ़ गई है।

अगस्त के मुकाबले सितंबर में महंगाई में तेजी

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर महीने में भारत में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 5.54% हो गई, जबकि खाद्य महंगाई दर 7.74% तक पहुंच गई। यदि आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी। यानी एक महीने के भीतर महंगाई दर में 0.71 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी बताती है कि सितंबर के महीने में देश में खुदरा महंगाई दर और खाद्य महंगाई दर दोनों में तेजी आई है। यह महंगाई दर इस साल के अब तक के ऊंचे स्तरों में शामिल है। अर्थशास्त्रियों ने महंगाई दर 5.4 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़ा इससे थोड़ा अधिक रहा।

यहां बता दें कि, खुदरा महंगाई के ये आंकड़े उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आधार पर तैयार किए जाते हैं। इसमें यह देखा जाता है कि आम लोग रोजमर्रा में जिन वस्तुओं और सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं, उनकी कीमतों में पिछले साल के मुकाबले कितना बदलाव आया है।

खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से बिगड़ा बजट

सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी रही। खाद्य महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई। इसका सीधा असर रसोई के बजट पर पड़ सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में प्याज की महंगाई दर सालाना आधार पर 108.09 प्रतिशत दर्ज की गई, इससे पहले अगस्त में यह 48.78% थी। वहीं अदरक की महंगाई दर 62.85 प्रतिशत और लहसुन की 43.60% से बढ़कर 54.62% प्रतिशत हो गई। नींबू की महंगाई दर भी बढ़कर 36.41 प्रतिशत पर पहुंच गई। इन वस्तुओं की कीमतों में तेजी ने खाद्य महंगाई को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि, सभी खाद्य पदार्थ महंगे नहीं हुए। सरकारी आंकड़ों में आलू की कीमतों में साल-दर-साल 11.50% की गिरावट आई, जबकि टमाटर की कीमतों में 8.62% की गिरावट आई है। इससे साफ है कि महंगाई का असर अलग-अलग वस्तुओं पर अलग-अलग पड़ रहा है। इसके बावजूद कई जरूरी खाद्य वस्तुओं के महंगे होने से आम परिवारों के खर्च में बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है।

गांवों में महंगाई का असर शहरों से ज्यादा

सितंबर के आंकड़ों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच भी अंतर देखने को मिला। ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.88 प्रतिशत रही। इसका मतलब है कि गांवों में कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव शहरों के मुकाबले अधिक रहा।

Created On :   12 Oct 2026 7:00 PM IST

Tags

Next Story