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AirAsia India ने पायलटों के मई, जून के वेतन में की 40 फीसद कटौती

June 03rd, 2020 12:02 IST
AirAsia India ने पायलटों के मई, जून के वेतन में की 40 फीसद कटौती

हाईलाइट

  • मई और जून माह के वेतन में औसतन 40 फीसद की कटौती की है
  • अन्य श्रेणियों के कार्यकारियों के वेतन में 7-17 फीसद की कटौती की गई थी
  • उससे कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए कोई कटौती नहीं की गई थी

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एयरएशिया इंडिया ने अपने पायलटों के मई और जून माह के वेतन में औसतन 40 फीसद की कटौती की है। एयरलाइन के एक सूत्र ने यह जानकारी दी। सूत्र के मुताबिक, अन्य श्रेणियों और वरिष्ठ प्रबंधन के वेतन में कटौती अप्रैल के समान ही रहेगी। एयरएशिया इंडिया के वरिष्ठ प्रबंधन ने अप्रैल में वेतन में 20 फीसद की कटौती ली थी। अन्य श्रेणियों के कार्यकारियों के वेतन में 7-17 फीसद की कटौती की गई थी। हालांकि, 50,000 रुपये या उससे कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए कोई कटौती नहीं की गई थी। 

टाटा-एसआईए के संयुक्त उद्यम वाली विमानन कंपनी अगले सप्ताह अपने परिचालन के छह साल पूरे कर रही है। एयरलाइन के कर्मचारियों की संख्या 2,500 है। एयरलाइन के 30 एयरबस ए320 विमानों के बेड़े के लिए पायलटों की संख्या 600 है। एक सूत्र ने बताया, पहले एक पायलट को उड़ान का परिचालन करने या नहीं करने पर भी निश्चित 70 घंटे का भुगतान किया जाता था। 

अब इसे घटाकर 20 घंटे कर दिया गया है। इस तरह फर्स्ट ऑफिसर (जूनियन पायलट) का वेतन 1.40 लाख रुपये से घटकर 40,000 रुपये रह गया है। वहीं कैप्टन यानी वरिष्ठ पायलट का वेतन 3.45 लाख से घटकर एक लाख रुपये पर आ गया है।' उन्होंने कहा कि एक पायलट के कुल वेतन का 40 फीसद वेतन में कमी है।

इस पर एयरएशिया इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, 'हम कंपनी से संबंधित आंतरिक मामलों पर टिप्पणी नहीं करते हैं।' सूत्र ने यह भी कहा कि एयरलाइन ने फिलहाल किसी भी नए विमान को बेड़े में शामिल करने की अपनी योजना को टाल दिया है। इससे पहले, एयरएशिया इंडिया ने अगले साल मार्च के माध्यम से पांच और ए 320 की डिलीवरी लेने की योजना बनाई थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।