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मुनाफावसूली के दबाव में टूटे सेंसेक्स, निफ्टी (साप्ताहिक समीक्षा)

October 26th, 2019 20:31 IST
 मुनाफावसूली के दबाव में टूटे सेंसेक्स, निफ्टी (साप्ताहिक समीक्षा)

हाईलाइट

  • मुनाफावसूली के दबाव में टूटे सेंसेक्स, निफ्टी (साप्ताहिक समीक्षा)

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय शेयर बाजार में मुनाफावसूली हावी होने के कारण इस सप्ताह विकवाली का दबाव बना रहा, जिससे प्रमुख संवेदी सूचकांकों में पिछले सप्ताह के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई। हालांकि उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स 39,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर रहा।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सप्ताह के मुकाबले 240.32 अंकों यानी 0.61 फीसदी की गिरावट के साथ 39,058.06 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी पिछले सप्ताह के मुकाबले 77.95 अंकों यानी 0.67 फीसदी की गिरावट के साथ 11,583.90 पर बंद हुआ।

बीएसई मिड-कैप सूचकांक 78.49 अंकों यानी 0.54 फीसदी की गिरावट के साथ 14,341.76 पर रहा, जबकि बीएसई स्मॉल-कैप सूचकांक 26.23 अंकों यानी 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ 13,153.06 पर बंद हुआ।

सप्ताह के आरंभ में सोमवार को महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने के कारण शेयर बाजार में कारोबार बंद रहा। अगले दिन मंगलवार को लगातार छह सत्रों की तेजी के बाद मुनाफावसूली के कारण घरेलू शेयर बाजार में विकवाली का दबाव बढ़ा, जिससे सेंसेक्स 334.54 अंक यानी 0.85 फीसदी टूट कर 38,963.84 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 71.95 अंकों यानी 0.62 फीसदी की गिरावट के साथ 11,589.90 पर बंद हुआ।

हालांकि इस कारोबारी सप्ताह के दूसरे सत्र में बुधवार को उतार-चढ़ाव के बीच सेंसेक्स 94.99 अंकों यानी 0.24 फीसदी की बढ़त के साथ 39,058.83 पर बंद हुआ और निफ्टी भी 15.75 अंकों यानी 0.14 फीसदी की बढ़त के साथ 11,604.10 पर बंद हुआ।

अगले दिन गुरुवार को फिर कारोबार नरम रहा और सेंसेक्स 38.44 अंकों यानी 0.10 फीसदी की गिरावट के साथ 39,020.39 पर रहा, जबकि निफ्टी 21.50 अंकों यानी 0.19 फीसदी की गिरावट के साथ 11,582.60 पर बंद हुआ।

कारोबारी सप्ताह के आखिरी सत्र में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव के बीच फिर प्रमुख संवेदी सूचकांकों में सुधार हुआ। सेंसेक्स 37.67 अंकों यानी 0.10 फीसदी की बढ़त के साथ 39,058.06 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी महज 1.30 अंकों यानी 0.01 फीसदी की बढ़त के साथ 11,583.90 पर ठहरा।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।