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भारत से सीमा पर टकराव के बीच आर्थिक संकट से जूझ रहा चीन

June 17th, 2020 20:02 IST
 भारत से सीमा पर टकराव के बीच आर्थिक संकट से जूझ रहा चीन

हाईलाइट

  • भारत से सीमा पर टकराव के बीच आर्थिक संकट से जूझ रहा चीन

नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। चीन की ओर से लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास भारत के खिलाफ सैन्य आक्रामकता को बढ़ा दिया है, जिससे दोनों सेनाओं की बीच हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो चुके हैं। इस घटनाक्रम के बीच चीन में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

देश की बेरोजगारी दर में वृद्धि, बढ़ते ऋण और तीव्र आर्थिक मंदी के साथ काफी चीनी नागरिकों में अनिश्चितता और चिंता बढ़ी हुई है, जिसकी वजह से चीन कूटनीतिक तौर पर अपने कदम पीछे रख सकता है।

इसके अलावा कोरोनावायरस महामारी के प्रसार की वजह से न केवल विश्व समुदाय बीजिंग पर सवाल उठा रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच भी चीन विरोधी भावनाएं बढ़ गई हैं। वहीं अब देश में कोरोनावायरस के प्रकोप की दूसरी लहर ने भी चीजों को बदतर बना दिया है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग कम्युनिस्ट चीन के संस्थापक माओत्से तुंग के बाद से सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक के रूप में उभरे हैं। मगर पिछले कुछ महीनों के दौरान उनकी लोकप्रियता पर भी खासा असर पड़ा है। विश्लेषकों का कहना है कि शी फिलहाल कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सैन्य आक्रमण मौजूदा दबाव वाले मुद्दों से स्थानीय लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एक कदम हो सकता है।

चीनी आर्थिक गतिविधियों ने उत्पादन शुरू करने वाली फैक्ट्रियों के साथ फिर से काम शुरू कर दिया है, मगर दुनिया भर में उसके निर्यात ऑर्डर घटते जा रहे हैं। चीन पिछले कई वर्षों से विभिन्न वस्तुओं का दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है।

एक विश्लेषक ने कहा, चीन यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा कर सकता है कि देश के लोगों का ध्यान उनके स्थानीय गंभीर मुद्दों से विचलित हो जाए। कई विश्लेषकों ने यह भी कहा है कि चीन अपनी स्वयं की ऋण कूटनीति में फंस सकता है, क्योंकि कई देशों को आगे होने वाले आर्थिक व्यवधानों के कारण उसे ऋण चुकाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

पाकिस्तान, किर्गिस्तान, श्रीलंका और कुछ अफ्रीकी देशों सहित कई देशों को ऋण या विलंब भुगतान के लिए मजबूर किया जा सकता है। अप्रैल में चीन की बेरोजगारी दर छह फीसदी थी। इसमें असंगठित क्षेत्र के आंकड़े शामिल नहीं है।

एक क्वाट्र्ज रिपोर्ट में कहा गया है, चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा 15 मई को जारी किए गए नवीनतम आधिकारिक नौकरियों के आंकड़ों में अप्रैल में बेरोजगारी दर छह प्रतिशत रखी गई है, जो मार्च में 5.9 प्रतिशत से थोड़ी ऊपर और फरवरी में रिकॉर्ड 6.2 प्रतिशत की तुलना में कम है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इसे काफी कमतर आंका गया है। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट और सोसाइटी जेनरेल के विश्लेषकों ने बेरोजगारी की दर को 10 फीसदी के करीब रखा है।

कोरोनावायरस महामारी के प्रसार के बीच, कई वैश्विक कंपनियों ने पहले ही चीन के बाहर अपनी विनिर्माण इकाईयों को स्थानांतरित करने में रुचि दिखाई है। काफी कंपनियों को डर है कि बेरोजगारी बढ़ने से सामाजिक अशांति भी बढ़ सकती है।

इसके साथ ही चीन कोरोनावायरस महामारी से निपटने में अपनी भूमिका को लेकर भी संदिग्ध बना हुआ है। वहीं हांगकांग और ताइवान के साथ चल रहे हालिया घटनाक्रम पर भी वह सवालों के घेरे में आ चुका है। एक विश्लेषक ने कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि भारत के खिलाफ इसकी आक्रामकता की खास वजह हो सकती है। उन्होंने कहा कि अपने नागरिकों के बीच उसकी लोकप्रियता को बढ़ाने के लिए यह एक उपाय के तौर पर हो सकता है।

पहल इंडिया फाउंडेशन में अनुसंधान प्रमुख निरुपमा सुंदरराजन ने एक साक्षात्कार में कहा, चीन के साथ भारत के संबंध हमेशा से तल्ख रहे हैं। भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह आवश्यक उत्पादों के लिए चीनी आयात पर निर्भर न हो।

कुछ महीने पहले तक हालांकि शी को अपने देश और विदेश में उच्च अनुमोदन (अप्रूवल) रेटिंग मिली थी।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।