दैनिक भास्कर हिंदी: महंगाई नियंत्रण में, राजकोषीय घाटे को 3.3% बनाए रखने का लक्ष्य : अरुण जेटली

September 16th, 2018

हाईलाइट

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर जारी दो दिवसीय बैठक शनिवार को खत्म हो गई।
  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि वित्त मंत्रालय के साथ ये एक इंटरनल मीटिंग थी।
  • जेटली ने कहा, सरकार का वित्तीय घाटे (फिस्कल डेफिसिट) को 3.3% बनाए रखने का लक्ष्य है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अर्थव्यवस्था की सेहत का जायजा लेने के लिए की जा रही दो दिवसीय बैठक शनिवार को खत्म हो गई। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि वित्त मंत्रालय के साथ ये एक इंटरनल मीटिंग थी। DEA ने इस मीटिंग में विस्तृत प्रजंटेशन दिया। पीएम मोदी ने इस दौरान वित्त मंत्रालय के विभिन्न विभागों की समीक्षा की। बैठक के बाद अरुण जेटली ने कहा कि मोटे तौर पर देखा जाए तो महंगाई नियंत्रण में है। सरकार का राजकोषीय घाटे (फिस्कल डेफिसिट) को 3.3% बनाए रखने का लक्ष्य है।

अरुण जेटली ने कहा, बैठक में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था और मेक्रोइकोनॉमिक डेटा पर अपनी संतुष्टि व्यक्त की है। उन्होंने कहा, हमें पूरा विश्वास है कि हम वित्तीय घाटे के 3.3% के लक्ष्य को बनाए रखेंगे। जेटली ने महंगाई को भी नियंत्रण में बताया। जेटली ने कहा, सरकार को पूरा विश्वास है कि विकास दर बजट की उम्मीदों की तुलना में अधिक होगी। उन्होंने कहा, नोटबंदी और GST के भी परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। उन्होंने कहा GST, नोटबंदी के बाद रिटर्न फाइलिंग में बढ़त आई है। जेटली ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेस में राजस्व विभाग की उस जानकारी का भी जिक्र किया जिसमें राजस्व विभाग ने बताया कि टैक्स कलेक्शन के मामले में हम तय समय से काफी आगे चल रहें है। जेटली ने कहा, हम विकास दर और टैक्स कलेक्शन को लेकर आशावादी हैं।

गौरतलब है कि सरकार की आय से ज्यादा खर्च होने पर फिस्कल डेफिसिट या वित्तीय घाटे की स्थिति आती है। वित्तीय घाटा बजट खर्च का वो हिस्सा है जो कर्जा लेकर पूरा किया जाता है। वित्त वर्ष 2014-15 अंतरिम बजट में सरकार का खर्च 17 लाख करोड़ रुपये था और वित्त वर्ष 2014-15 अंतरिम बजट में सरकार की आय 12 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह वित्त वर्ष 2014-15 अंतरिम बजट में फिस्कल डेफिसिट करीब 5 लाख करोड़ रुपये रहा था। जीडीपी के प्रतिशत में फिस्कल डेफिसिट की तुलना की जाती है। इकोनॉमी की स्थिरता के लिए फिस्कल डेफिसिट पर काबू पाना जरूरी है।

इससे पहले शुक्रवार को मीटिंग की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया था कि केंद्र सरकार ने विदेशों से कर्ज लेने के नियमों में ढील देने और गैर-जरूरी आयातों पर पाबंदी लगाने फैसला लिया है। इस निर्णय का मकसद चालू खाते के घाटे (कैड) पर अंकुश लगाना और विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाना है, इसके साथ ही सरकार ने निर्यात को प्रोत्साहित करने और गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाने का भी फैसला किया गया था। मीटिंग में RBI गवर्नर ने वर्ल्ड इकोनॉमी को लेकर और एक्सटर्नल फैक्टर्स की स्थिति के बारे में एक विस्तृत प्रजेनटेशन दिया था, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा था कि दुनिया के अन्य देशों की तुलना में हमारी विकास दर काफी अधिक है। हमारे देश में महंगाई एक सीमा में रहती है और यह सीमा मध्यम है।

वित्त मंत्री ने कहा था इंफ्रास्ट्रक्चर लोन के लिए अनिवार्य हेजिंग स्थितियों की समीक्षा की जाएगी ताकि निर्माण क्षेत्र की इकाइयों को एक साल की मिनिमम मैच्यूरिटी के साथ 50 मिलियन तक का बाहरी देशों से लोन (ECB) लिया जा सके। वित्त मंत्री ने ये भी कहा था कि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट (FPI) कॉर्पोरेट बॉन्ड पोर्टफोलियो के 20% के एक्सपोजर सीमा को हटाकर एक सिंगल कॉर्पोरेट ग्रुप में करने को लेकर भी समीक्षा की जाएगी।

बैठक में शामिल हुए DEA सेक्रेटरी ने कहा था आज की चर्चा करंट अकाउंट और उसे फाइनेंस करने के लिए कैपिटल अकाउंट में क्या किया जा सकता है इस पर केंद्रित थी। उन्होंने कहा था कि इस पर आगे भी मंथन होगा, शायद अगले हफ्ते।

वित्त मंत्रालय में प्रिंसिपल इकोनॉमिक एडवाइजर संजीव सान्याल ने कहा था साल की शुरुआत से ही डॉलर के मुकाबले रुपए में गिरावट आ रही है। लेकिन यदि आप 5 साल का पर्सपेक्टिव लेते हैं तो आप देखेंगे कि डॉलर को छोड़कर ज्यादातर करंसी के मुकाबले रुपया स्थिर रहा है।