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राज्यों के मुआवजे पर जीएसटी परिषद की जुलाई में फिर बैठक : वित्तमंत्री

June 12th, 2020 19:31 IST
 राज्यों के मुआवजे पर जीएसटी परिषद की जुलाई में फिर बैठक : वित्तमंत्री

हाईलाइट

  • राज्यों के मुआवजे पर जीएसटी परिषद की जुलाई में फिर बैठक : वित्तमंत्री

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रव्यापी बंद के बाद देश भर में आर्थिक गतिविधियां बंद होने से जीएसटी संग्रह में भारी गिरावट आई है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार राज्यों को जीएसटी मुआवजा देने पर गौर कर सकती है।

कोरोनावायरस के संकट के बाद शुक्रवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की पहली बैठक हुई। बैठक में जनता को राहत पहुंचाने के लिए कई निर्णय लिए गए।

बैठक के बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि परिषद ने जुलाई में एकल बिंदु एजेंडा के साथ मुआवजा उपकर पर चर्चा करने के लिए फिर से बैठक करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि राज्यों की मुआवजा की जरूरतों पर विचार के लिए यह विशेष बैठक होगी।

उन्होंने कहा, अगर राज्यों के मुआवजे को पूरा करने के लिए उधार की आवश्यकता है तो कौन उधार लेने जा रहा है। हम इसके लिए कैसे भुगतान करने जा रहे हैं।

वित्तमंत्री ने कहा कि अगर राज्यों को मुआवजा देना पड़ा तो यह किसी न किसी तरह से कर्ज हो जाएगा। उन्होंने सवाल किया कि इसे कैसे और कौन चुकाएगा।

जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद इसमें निहित कानून के तहत, राज्यों को पहले पांच वर्षों के लिए किसी भी राजस्व हानि के लिए पूर्ण मुआवजे की गारंटी दी गई है। मुआवजा वास्तविक राजस्व और अनुमानित राजस्व के बीच का अंतर है। अनुमानित राजस्व आधार वर्ष 2015-16 में राज्यों के लिए प्रति वर्ष 14 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि है।

जीएसटी अधिनियम के अनुसार, राज्यों को पूर्ण मुआवजे का भुगतान वित्त वर्ष 2022 तक पांच वर्ष के लिए केवल उस क्षतिपूर्ति निधि के माध्यम से किया जाना चाहिए, जो कुछ वस्तुओं पर जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के माध्यम से फंड प्राप्त करता है।

हालांकि अगस्त 2019 से पर्याप्त संग्रह नहीं मिल रहा है और राज्यों को जीएसटी मुआवजा मिलने में भी देरी हुई है। अब केंद्र मुआवजे के लिए जीएसटी परिषद में एक तंत्र स्थापित करने पर विचार कर रहा है।

जीएसटी राजस्व पर स्थिति अप्रैल के महीने में खराब हो गई है। कई राज्यों को इस वर्ष के दौरान औसत मासिक संग्रह में 80 से 90 प्रतिशत तक कमी झेलनी पड़ी है।

दिल्ली सरकार ने कहा है कि उसका जीएसटी संग्रह पिछले साल अप्रैल महीने में 3,500 करोड़ रुपये के संग्रह के मुकाबले इस बार अप्रैल में महज 300 करोड़ रुपये तक गिर सकता है। इसके अलावा तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में भी कोविड-19 के कारण लागू राष्ट्रव्यापी बंद के दौरान आर्थिक गतिविधियों में कमी रहने से गंभीर राजस्व गिरावट देखने को मिला है। यह समस्या मई में भी जारी रही है।

सरकार के सूत्रों ने बताया कि 2020-21 में राज्यों के लिए मासिक मुआवजे की आवश्यकता 20,250 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। वित्त वर्ष 2021 में भी मासिक उपकर 7,000-8,000 करोड़ रुपये या उससे कम हो सकता है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

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डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।