दैनिक भास्कर हिंदी: सितंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर हुई 3.77%, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन तीन महीने के निचले स्तर पर

October 12th, 2018

हाईलाइट

  • रिटेल महंगाई दर के सितंबर माह के आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए।
  • खाने-पीने का सामान और सब्जी महंगी होने के चलते रिटेल महंगाई दर में बढ़ोतरी देखी गई है।
  • CPI आधारित महंगाई दर सितंबर 2018 में बढ़कर 3.77 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच गई। अगस्त 2018 में यह 3.69% थी।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। रिटेल महंगाई दर के सितंबर माह के आंकड़े शुक्रवार को जारी किए गए। खाने-पीने का सामान और सब्जी महंगी होने के चलते रिटेल महंगाई दर में बढ़ोतरी देखी गई है। उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर सितंबर 2018 में बढ़कर 3.77 फीसदी के स्‍तर पर पहुंच गई। अगस्त 2018 में यह 3.69% थी। वहीं सितंबर 2017 में 3.28% थी। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के आंकड़ों में भी गिरावट आई है। IIP का यह तीन महीनों का नीचला स्तर है। जुलाई 2018 में IIP 6.6% की तुलना में अगस्त में 4.3% रहा। इसी समय साल 2017 में IIP 4.3 % था।

खाने-पीने के सामान की महंगाई दर सितंबर में 0.29% के मुकाबले बढ़कर 1.08% हो गई। ईंधन और बिजली की महंगाई दर बिना किसी बदलाव के 8.47% रही। अनाज की महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई है। यह अगस्त के 2.98% के मुकाबले 3.12% रही। सब्जियों की महंगाई दर -7% से बढ़कर सितंबर में -4.15% हो गई। दालों की महंगाई दर में भी बढ़ोतरी हुई है। यह 7.76% के मुकाबले 8.58% रही। अगस्त के 4.88% की तुलना में सितंबर में कपड़ों और जूतों की महंगाई दर घटकर 4.46% हो गई। हाउसिंग की महंगाई दर अगस्त में 7.59% थी जो सितंबर में घटकर 7.07% रह गई।

इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) अगस्त में 4.3% रहा। यह जुलाई में 6.6% था। यानी इसमें 2.3% की गिरावट आई है। वहीं माइनिंग ग्रोथ 3.7% के मुकाबले -0.4%, मेनुफेक्चरिंग ग्रोथ 7% के मुकाबले 4.6%, इलेक्ट्रिसिटी ग्रोथ 6.7% के मुकाबले 7.6%, प्राइमरी गुड्स ग्रोथ 6.9% के मुकाबले 2.6%, कैपिटल गुड्स ग्रोथ 3% के मुकाबले 5%, इंटरमीडिएट गुड्स ग्रोथ 1.2% के मुकाबले 2.4%, कंज्यूमर ड्यूरेबल ग्रोथ 14.4% के मुकाबले 5.2% और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल ग्रोथ 5.6% के मुकाबले 6.3% रही। 

क्या होता है CPI इंडेक्स?
CPI यानि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक। यह रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी की करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं।