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रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन में एमएसपी में वृद्धि की अहम भूमिका : सीएसीपी चेयरमैन

June 11th, 2020 19:31 IST
 रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन में एमएसपी में वृद्धि की अहम भूमिका : सीएसीपी चेयरमैन

हाईलाइट

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नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। भारत बीते चार साल से खाद्यान्नों के उत्पादन में हर साल नया रिकॉर्ड बना रहा है और कोरोना काल की विषम परिस्थितियों के बावजूद अगले साल फिर नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद की जा रही है क्योंकि मानसून इस साल फिर मेहरबान रहने वाला है।

लेकिन इस उपलब्धि के पीछे फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में मोदी सरकार द्वारा हाल के वर्षो में की गई वृद्धि और सरकारी खरीद को प्रोत्साहन की भी अहम भूमिका रही है। कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे किसानों का मनोबल ऊंचा होता है।

कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) के अध्यक्ष विजय पॉल शर्मा कहते हैं कि एमएसपी में वृद्धि से किसानों के बीच सकारात्मक संदेश जाता है और फसलों का लाभकारी दाम मिलने की उम्मीदों से वे उत्साहित होते हैं।

केंद्र सरकार सीएसीपी की सिफारिश के आधार पर ही गन्ना का लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी और 22 अन्य फसलों का एमएसपी तय करती है। इन फसलों में सात सात अनाज, पांच दलहन, सात तिलहन और गन्ना समेत चार नकदी फसल शामिल हैं।

सीएसीपी के अध्यक्ष प्रोफेसर विजय पॉल शर्मा ने आईएएनएस से खास बातचीत में कहा, एमएसपी में जो बढ़ोतरी रही उसका बेशक काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ा और खाद्यान्न उत्पादन में इजाफा होने में इसकी अहम भूमिका है, लेकिन गैर-मूल्य के जो कारक हैं जैसे कृषि क्षेत्र में संरचनात्मक और प्रौद्योगिकी विकास का भी इसमें योगदान है।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी फसल वर्ष 2019-20 (जुलाई-जून) के तीसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के अनुसार इस साल देश में खाद्यान्नों का रिकॉर्ड 29.56 करोड़ टन उत्पादन हो सकता है जबकि सरकार ने अगले साल 2020-21 के लिए 29.83 करोड़ टन का लक्ष्य रखा है। बता दें कि देश में खाद्यान्नों का उत्पादन 2016-17 के दौरान 27.51 करोड़ टन और 2018-19 में 28.52 करोड़ टन हुआ था।

देश में एमएसपी की प्रणाली बीते चार दशक से ज्यादा समय से लागू है, लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद इसमें किए गए बदलाव के बारे में पूछे जाने पर प्रोफेसर शर्मा ने कहा, सरकार ने अब हर फसल की लागत पर कम से कम 50 फीसदी मार्जिन किसानों को देना सुनिश्चत कर दिया है। पहले काफी सारी फसलों का एमएसपी लागत के मुकाबले काफी लाभकारी नहीं होता था। यह एक महत्वपूर्ण फैसला है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकारी खरीद को प्रोत्साहित किया गया जिसमें धान और गेहूं के अलावा दलहन और तिलहन फसलों की खरीद भी होने लगी है जिससे किसान उत्साहित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कपास की इस साल रिकॉर्ड सरकारी खरीद हुई है। शायद यही वजह है कि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में रूई के दाम में भारी गिरावट के बावजूद भारत में कपास की खेती के प्रति किसानों की दिलचस्पी कम नहीं हुई है।

इसी तरह, धान और गेहूं की सरकारी खरीद व्यापक पैमाने पर होने से किसानों का एमएसपी का लाभ मिल रहा है जिसके कारण दोनों फसलें लगाने के प्रति किसानों की दिलचस्पी ज्यादा रहती है, जबकि इसमें दो राय नहीं कि किसानों को जिन फसलों का अच्छा दाम मिलता है उसकी खेती करने के प्रति उनकी दिलचस्पी बढ़ती है। मसलन, वर्ष 2015-16 में दलहनों का उत्पादन 163.2 लाख टन होने के कारण देश में तमाम दालों के दाम आसमान छू गए थे जिससे उत्साहित किसानों ने दलहनों की खेती में काफी दिलचस्पी दिखाई और 2017-18 में दहलनों का उत्पादन बढ़कर 254.2 लाख टन हो गया जोकि सालाना खपत से भी ज्यादा था। हालांकि इसके बाद दलहनों का उत्पादन 2018-19 में घटकर 220.8 लाख टन और 230.1 लाख टन हो गया। प्रोफेसर शर्मा कहते हैं कि बीते खरीफ सीजन में बारिश के कारण फसल खराब होने के कारण इस साल दलहनों का उत्पादन कम रहा है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में आगामी खरीफ सीजन की 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में लागत के मुकाबले 50 से 83 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है।

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