दैनिक भास्कर हिंदी: जेपी ग्रुप बेचना चाहता है यमुना एक्सप्रेस वाली जमीन, SC में लगाई गुहार

October 13th, 2017

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। निम्न और मध्यम वर्गीय लोगों के घर का सपना पूरा करने के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जयप्रकाश (जेपी) एसोसिएट्स को राहत देने से इनकार कर दिया था। यही कारण है कि जेपी ग्रुप की वित्तीय मुश्किलें बढ़ने लगी हैं और अब उसने अपनी जमीन बेचने का फैसला कर लिया है। जेपी ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह यमुना एक्सप्रेस वे के आसपास की जमीन को दूसरी कंपनी को 2500 करोड़ में देना चाहता है। कोर्ट ने 23 अक्टूबर तक रकम जमा करने को कहा है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 27 अक्टूबर तक जेपी ग्रुप कोर्ट में रजिस्ट्री के 2000 करोड़ रुपये जमा कराए। सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के दिवालिया घोषित किए जाने के मामले पर पिछली सुनवाई में यह रकम जमा कराने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद जेपी इंफ्रा ने कोर्ट से राहत की गुहार लगाई थी। हालांकि, कोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। साथ ही यह भी कहा था कि हम अपने आदेश में कोई संशोधन नहीं करेंगे।

अन्य कंपनी को मिलेगा अधिकार
यमुना अथॉरिटी ने 500 एकड़ की जमीन अलॉट की थी। यह जमीन जेपी ने अथॉरिटी से लीज पर लेकर के कई प्राइवेट बिल्डरों को सब-लीज पर दे दी थी। यह ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ है। जमीन के पास में ही बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट और स्पोर्ट्स सिटी है। यानी अब यमुना एक्सप्रेस वे के आसपास की जमीन का अधिकार जल्द ही किसी अन्य कंपनी को मिल सकता है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को करेगा।

घर खरीदारों के हक में फैसला
इससे पहले चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, हम कंपनी के हितों की चिंता नहीं। कंपनी बंगाल की खाड़ी में डूबती है तो डूब जाए, हमें घर खरीदारों की फिक्र है। इन खरीदारों में से ज्यादातर निम्न और मध्यम वर्ग के हैं। फ्लैट खरीदारों का संरक्षण किए जाने की जरूरत है। यह हमारा कर्तव्य है और उन्हें या तो फ्लैट दिया जाना चाहिए या उनका पैसा वापस मिलना चाहिए।