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पेट्रोल-डीजल पर राहत नहीं, मोदी सरकार नहीं करेगी एक्साइज ड्यूटी में कटौती

September 05th, 2018 14:15 IST

हाईलाइट

  • देश में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल और डीजल के दाम ने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है।
  • मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दाम से राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की संभावनाओं को खारिज कर दिया है।
  • मंगलवार को पेट्रोल की कीमत 79.31 रुपये प्रति लीटर के रिकार्ड की ऊंचाई पर पहुंच गई।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल और डीजल के दाम ने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है। आम आदमी को उम्मीद थी कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से इस पर लगाम लगाएगी, लेकिन वहां से भी उसे निराशा ही हाथ लगी है। मोदी सरकार ने पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दाम से राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) में कटौती की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। बता दें कि मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 79.31 रुपये प्रति लीटर की रिकार्ड ऊंचाई पर पहुंच गई। वहीं डीजल का दाम 71.34 रुपये के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया है। जबकि मुंबई में पेट्रोल 87 रुपए लीटर के करीब बिक रहा है।

एक उच्च अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि भारतीय रुपए की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गिरती जा रही है। यही कारण है कि आयात महंगा हो रहा है। सरकार को लगता है कि ऐसी परिस्थिति में यदि वह पेट्रोल, डीजल से एक्साइज ड्यूटी में कटौती करती है, तो इससे चालू खाते का घाटा और भी अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में मोदी सरकार पेट्रोल, डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करके राजकोषीय गणित के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहती। सरकार ने कहा है कि राजस्व वसूली में किसी तरह की कटौती की उसके समक्ष बहुत कम गुंजाइश है।

वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हम पहले से ही जानते हैं कि चालू खाते के घाटे पर असर होगा। यह जानते हुए हम राजकोषीय घाटे के संबंध में कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकते हैं, हमें इस मामले में समझदारी से फैसला करना होगा।'

वहीं पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, "पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी चिंता वाली बात है। पेट्रोल-डीजल पर अत्यधिक टैक्स वसूलने की वजह से दाम इतने ज्यादा बढ़े हैं। यदि करों में कटौती की जाती है, तो कीमतें काफी कम हो जाएंगी।"

बता दें कि मंगलवार को भारतीय मुद्रा, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 71.54 के रिकार्ड निम्न स्तर तक गिर गई, जिसकी वजह से आयात महंगा हो गया।

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