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MP: आयकर विभाग की नई वेबसाइट बनी दुविधा, लॉन्च के बाद से बंद रहने से अटके आयकरदाताओं के काम

MP: आयकर विभाग की नई वेबसाइट बनी दुविधा, लॉन्च के बाद से बंद रहने से अटके आयकरदाताओं के काम

हाईलाइट

  • आयकरदाताओं को सुविधा देने 7 जून को लॉन्च हुई
  • लॉन्च के बाद से ही साइट धीमी गति से चल रही है
  • कई आयकरदाताओं को जून तक जमा करना है टैक्स

डिजिटल डेस्क, भोपाल। इनकम टैक्स (Income Tax) यानी कि सरकार को दिए जाने वाला वो टैक्स जो आपकी कमाई के स्लैब के दायरे में आने के बाद देना होता है। इस टैक्स को जमा करने के वैसे तो कई तरीके हैं, लेकिन यह टैक्स पेमेंट आप ऑनलाइन भी कर सकते हैं, जो कि अधिक सुविधापूर्ण होता है। लेकिन आयकरदाताओं को दी जाने वाली यह सुविधा अब दुविधा बनती नजर आ रही है। मामला मप्र का है, जहां आयकर विभाग की नई वेबसाइट लॉन्च के बाद से बंद है। ऐसे में आयकारदाताओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 

आपको बता दें कि आयकरदाताओं को सुविधा के तहत इनकम टैक्स की नई वेबसाइट 7 जून 2021 को लॉन्च की गई थी। लेकिन अब इस वेबसाइट पर ना तो आयकर रिटर्न फॉर्म डाउनलोड हो रहा है और ना ही ऑडिट रिपोर्ट अपलोड हो रही है। 

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सूत्रों की मानें तो, वेबसाइट के बंद रहने से जून माह में आयकरदाताओं को काफी समस्याओंं का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी भोपाल में ऐसे हजारों आयकरदाता हैं, जिनके काम नहीं हो सके हैं। इनमें नए बैंक लोन से लेकर कंपनी एक्ट के तहत ऑडिट रिपोर्ट फाइल करने जैसे कार्य शामिल हैं।

समस्या जस की तस
आयकर विभाग की नई वेबसाइट को लॉन्च करने का उद्देश्य आयकरदाताओं को अधिक सुविधा मुहैया कराना था। जिसमें आयकर और जीएसटी के रिटर्न और दूसरे डेटा एक ही जगह दिखना। आम आदमी के रिटर्न भरे हुए आना। शेयर और म्यूचुअल फंड की बिक्री से कैपिटल गैन होने की जानकारी, आयकरदाता को कुछ टैक्स यूपीआई और डेबिट-क्रेडिट कार्ड से बकाया टैक्स जमा कराने की सुविधा मिलना आदि शामिल हैं।

लेकिन बात करें इस माह की तो शुरुआती दिनों में 1 से 6 जून तक आयकर विभाग की वेबसाइट पूरी तरह बंद रही। वहीं इसकी लॉन्च तारीख यानी कि 7 जून को भी इसे समय से लॉन्च नहीं किया गया। वेबसाइट सुबह की जगह रात 9 बजे लॉन्च की गई। हालांकि लॉन्च होने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, दूसरे दिन यानी कि 8 जून से वेबसाइट धीमी गति से चलने के कारण रिटर्न फाइल नहीं हो पा रहे हैं। 

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इन लोगों को अधिक समस्या
- 2.5 लाख से अधिक की आय वाले सभी व्यक्तिगत आयकरदाताओं को आयकर रिटर्न भरना होता है। इनमें कंपनियां और पार्टनरशिप फर्म भी शामिल हैं। भोपाल में इनकी संख्या 70 हजार है और इन्हें ये टैक्स 30 सितंबर तक भरना होगा। 
- जबकि भोपाल में 17 हजार लोग ऑडिट रिपोर्ट फाइल करते हैं। इनमें ऐसे लोग शामिल होते हैं, जिनका प्रॉफिट कुल टर्नओवर के 8% से कम हो। इसके अलावा एक करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाली फर्मों को ऑडिट रिपोर्ट फाइल करनी होती है। हालांकि यह कार्य पूरे साल चलता है। 
- सबसे अधिक समस्या उन लोगों को है, जिन्हें टैक्स अंतिम तिथि 30 जून तक भरना है। इनमें 1 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यक्ति, पार्टनरशिप फर्म, ट्रस्ट, सोसायटी और कॉरपोरेशन शामिल हैं। इनकी संख्या 13 हजार है। 

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।